
दो गायों से शुरू हुआ सफर, आज डेयरी व्यवसाय बनी मंजू दीदी की पहचान
स्व-सहायता समूह के सहयोग से मासिक आमदनी में 20 से 25 हजार रुपये की बढ़ोतरी
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान मऊगंज मध्यप्रदेश
मऊगंज . मऊगंज जिले की मंजू मिश्रा जी की कहानी केवल एक महिला की सफलता की गाथा नहीं है, बल्कि यह इस बात की जीती-जागती मिसाल है कि कैसे सही अवसर और दृढ़ संकल्प से ग्रामीण भारत में बड़ा सामाजिक व आर्थिक बदलाव लाया जा सकता है।
सफर की शुरुआत और संघर्ष से जुड़ाव
वर्ष 2015 से पहले मंजू जी का जीवन साधारण ग्रामीण चुनौतियों से घिरा हुआ था। परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने की ललक में उन्होंने ‘शारदा स्व-सहायता समूह’ की सदस्यता ली और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद मंजू जी ने साहस दिखाया और पहली बार बैंक से कैश क्रेडिट लिमिट के तहत एक लाख रुपये का ऋण लिया। इस राशि से उन्होंने दो उन्नत नस्ल की दो गायें—साहीवाल और एचएफ (HF) खरीदीं। दोनों गायों से दूध का बेहतर उत्पादन होने लगा, जिससे उन्हें अपनी पहली व्यावसायिक सफलता मिली। दूध बिक्री से मिले लाभ ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया। उन्होंने अपनी छोटी सी शुरुआत को डेयरी के व्यवसाय में बदल दिया। व्यवसाय की प्रगति को देखते हुए उन्होंने दोबारा समूह के माध्यम से 2.5 से 3 लाख रुपये का सीसीएल ऋण लिया और कुछ और गायें खरीदीं।
आत्मनिर्भरता और आर्थिक बदलाव
आज श्रीमती मंजू मिश्रा का डेयरी व्यवसाय पूरी तरह स्थापित हो चुका है। आजीविका मिशन के सहयोग से अब उनकी मासिक आमदनी में बीस हजार से पच्चीस हज़ार रुपये तक की सीधी बढ़ोतरी हुई है। उनका परिवार आज न केवल वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन चुका है। “आजीविका मिशन ने मेरे जीवन को एक नई दिशा दी है। आज मैं न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हूँ, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर बेहद खुश हूँ।”
श्रीमती मुन्नी कटारिया स्व-सहायता समूह के माध्यम से मिली सहायता के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं आजीविका मिशन के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। वे कहती हैं कि समूह से जुड़कर महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है और वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
