
‘बाप्पा डॉट ऑर्ग’वर गणेशोत्सवातील पाच वैशिष्ट्यपूर्ण कथांची निवड
पुण्यातील नव्या घरातील गणेशोत्सवासह परंपरा, पर्यावरण आणि परदेशातील उत्सवाचा समावेश
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे, । सांस्कृतिक कार्य विभाग के ‘घरोघरी बाप्पा’ उपक्रम के तहत महाराष्ट्र के डिजिटल सांस्कृतिक संग्रह पोर्टल Bappa.org पर गणेशोत्सव की पांच विशेष कहानियों का चयन किया गया है। इनमें पुणे के नए घर में पहली बार गणेशोत्सव, कोंकण की पारंपरिक गौरी-गणपति परंपरा, घर पर बनाई गई मिट्टी की गणेश प्रतिमा, वियतनाम में भारतीय विद्यार्थियों द्वारा गणेशोत्सव और विसर्जन की मिट्टी से पौधों के संरक्षण की पहल शामिल है।
इस उपक्रम के माध्यम से महाराष्ट्र के घरों, सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों, ऐतिहासिक मंदिरों और विदेशों में बसे भारतीय समुदायों के गणेशोत्सव की यादों का डिजिटल संरक्षण किया जा रहा है। पोर्टल पर गणेशोत्सव से संबंधित फोटो और जानकारी साझा करने वाले नागरिकों, मंडलों अथवा मंदिर न्यासों को महाराष्ट्र सरकार की ओर से ‘डिजिटल सांस्कृतिक संवर्धक प्रमाणपत्र’ प्रदान किया जाता है।
पुणे के नए घर में पहली बार बाप्पा का आगमन
संजय मंगलाराम के परिवार ने इस वर्ष पुणे स्थित अपने नए घर में पहली बार गणराय का स्वागत किया। परिवार की दो छोटी बच्चियों ने पूजा और आरती की जिम्मेदारी संभाली। नई पीढ़ी को परंपरा से जोड़ने वाले इस पारिवारिक गणेशोत्सव को विशेष कहानी के रूप में चुना गया।
गुहागर की पारंपरिक गौरी-गणपति परंपरा
कोंकण के गुहागर क्षेत्र में महिलाएं पारंपरिक पीतल की थाली में गौरी की प्रतिमा, पूजा के नारियल और तेरड़े के डंठल लेकर सामूहिक रूप से गांव से गुजरती हैं। यह परंपरा खेती, प्रकृति, महिला शक्ति और पूर्वजों की संस्कृति से जुड़ी हुई है।
घर पर बनाई मिट्टी की गणेश प्रतिमा
निकिता जे. पांचाल ने प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमा और कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल न करते हुए घर पर कच्ची मिट्टी से गणेश प्रतिमा तैयार की और स्वयं रंग भरे। उनका यह प्रयास पर्यावरण अनुकूल गणेशोत्सव का संदेश देता है।
वियतनाम में विद्यार्थियों ने मनाया गणेशोत्सव
वियतनाम में पढ़ाई कर रहे भारतीय विद्यार्थियों ने एकजुट होकर गणेश चतुर्थी मनाई। सीमित संसाधनों के बावजूद विद्यार्थियों ने स्वयं मोदक तैयार किए और अपने मित्रों को भी उत्सव में शामिल किया। ईश्वर मनोहर बोरसे द्वारा दर्ज यह कहानी विदेश में भारतीय संस्कृति से जुड़े रहने का उदाहरण है।
विसर्जन की मिट्टी से 30 से अधिक पेड़ों का संरक्षण
पराग नारायण शेठ गुजराथी के परिवार में पिछले 65 वर्षों से सामूहिक रूप से गणेशोत्सव मनाया जा रहा है। पिछले छह वर्षों से परिवार मिट्टी की गणेश प्रतिमा स्थापित कर घर की छत पर ही उसका विसर्जन करता है। विसर्जन के बाद बची मिट्टी में पौधे लगाए जाते हैं और उन्हें पांच फीट से अधिक बढ़ने तक संरक्षित किया जाता है। इसके बाद पौधों को नदी किनारे और पहाड़ी क्षेत्रों में लगाया जाता है। इस पहल के माध्यम से अब तक 30 से अधिक पेड़ विकसित किए जा चुके हैं।
नागरिकों से सहभागिता की अपील
सांस्कृतिक कार्य विभाग ने नागरिकों, गृहनिर्माण संस्थाओं, सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों और मंदिर न्यासों से महाराष्ट्र के आधिकारिक डिजिटल सांस्कृतिक संग्रह में भाग लेने की अपील की है। इसके लिए Bappa.org पर गणेश प्रतिमा अथवा सजावट का फोटो अपलोड कर उससे जुड़ी परंपरा, सजावट या सामाजिक उपक्रम की संक्षिप्त जानकारी दर्ज की जा सकती है। जानकारी सफलतापूर्वक जमा होने के बाद डिजिटल सांस्कृतिक संवर्धक प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा।



