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नहरों की सिल्ट सफाई के कार्य में गुणवत्ता से कोई समझौता न हो : जिलाधिकारी

नहरों की सिल्ट सफाई के कार्य में गुणवत्ता से कोई समझौता न हो : जिलाधिकारी

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान इटावा उत्तर प्रदेश 

इटावा-जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में रबी 1434 फसली वर्ष 2026-27 के अंतर्गत जनपद में नहरों की सिल्ट सफाई के संबंध में बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद में प्रस्तावित नहरों की सिल्ट सफाई के कार्यों की समीक्षा करते हुए कार्ययोजना एवं अनुमोदन से संबंधित बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में बताया गया कि इटावा प्रखण्ड के अंतर्गत निचली गंगा नहर की कुल 65 शाखाएं हैं, जिनकी कुल लंबाई 446.239 किलोमीटर है। इसी प्रकार भोगनीपुर प्रखण्ड के अंतर्गत निचली गंगा नहर की 41 शाखाएं हैं, जिनकी कुल लंबाई 251.750 किलोमीटर है। सिंचाई खण्ड औरैया-दिबियापुर के अंतर्गत 03 नहरें हैं, जिनकी कुल लंबाई 6.540 किलोमीटर है। इस प्रकार जनपद में कुल 109 नहरों की कुल लंबाई 704.529 किलोमीटर है। इन नहरों में प्रस्तावित सिल्ट सफाई कार्य के अनुमोदन की प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक कार्रवाई पर चर्चा की गई।

जिलाधिकारी महोदय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि नहरों की सिल्ट सफाई का कार्य केवल औपचारिकता के रूप में न किया जाए, बल्कि स्थल पर रहकर कार्य की गुणवत्ता एवं प्रगति की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सिल्ट सफाई के दौरान नहर का निर्धारित लेवल किसी भी स्थिति में खराब नहीं होना चाहिए। संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी मौके पर उपस्थित रहकर कार्य की निगरानी करें, जिससे नहर की संरचना एवं जल प्रवाह प्रभावित न हो।

उन्होंने निर्देशित किया कि सिल्ट सफाई के कारण नहरों में जल प्रवाह बाधित न हो और नहर की इंजीनियरिंग को ध्यान में रखते हुए कार्य कराया जाए। नहरों में पानी के प्रवाह का तकनीकी अध्ययन करते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि टेल तक पर्याप्त मात्रा में पानी पहुंच सके।

जिलाधिकारी महोदय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्य की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए तथा मानकों के अनुरूप कार्य सुनिश्चित होने के बाद ही उसका सत्यापन किया जाए। उन्होंने कहा कि सिल्ट सफाई के कार्य में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता दोनों का विशेष ध्यान रखा जाए। कार्य के लिए उचित प्रक्रिया अपनाते हुए ही एजेंसी/ठेकेदार का चयन किया जाए तथा जिन कार्यदायी संस्थाओं का पूर्व में कार्य संतोषजनक नहीं रहा है, उनको टेंडर न दिया जाए।

जिलाधिकारी महोदय ने नहरों से निकलने वाली सिल्ट एवं मिट्टी के संबंध में भी निर्देश दिए कि निकाली गई मिट्टी का आकलन/अनुमान तैयार कर नियमानुसार उसकी नीलामी की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सिल्ट सफाई कार्य प्रारंभ होने से पूर्व नहरों की वास्तविक स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यकतानुसार कार्य की प्राथमिकता तय की जाए। कार्य के दौरान तकनीकी मानकों, नहर के लेवल, जल प्रवाह तथा सिंचाई व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जाए।

बैठक में आई0ए0एस कोमल पुनिया सहित संबंधित विभागीय अधिकारी एवं सिंचाई विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

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