नियमित निगरानी से 87% पॉलिसीधारकों के स्वास्थ्य में स्थिरता या सुधार: आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस का अध्ययन
~ 21 लाख से अधिक बीमित व्यक्तियों के स्वास्थ्य के आंकड़ों और रुझानों का विश्लेषण किया गया
~ लगभग 62% लोगों के प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों में 12 महीनों के भीतर उल्लेखनीय सुधार देखा गया
~ 45 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों में अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर का सबसे अधिक मामले दर्ज किये गये
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान मुंबई महाराष्ट्र
मुंबई, : आदित्य बिरला कैपिटल की हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी ‘आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस’ (एबीएचआईसीएल) ने आज अपनी एक नई रिसर्च रिपोर्ट “अनलॉकिंग हेल्थ ट्रैजेक्टरीज: रियल-वर्ल्ड बायोमेट्रिक ट्रेंड्स फ्रॉम इंश्योर्ड इंडियन पापुलेशंस” जारी की। इसमें सामने आया है कि लगातार हेल्थ ट्रैकिंग और सही देखभाल के जरिए 87% ग्राहकों ने अपनी सेहत या तो बेहतर की या फिर स्थिर बनाए रखी। यह स्टडी दिसंबर 2023 से दिसंबर 2025 के बीच 21 लाख वयस्क ग्राहकों के बिना नाम वाले आंकड़ों पर आधारित है। भारतीय हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में सेहत के सुधार और बदलाव को लेकर की गई यह सबसे बड़ी रिसर्च में से एक है।
जिन 21 लाख ग्राहकों के डेटा को देखा गया, उनमें से 5.2 लाख लोगों के पास कम से कम दो बार के जांच रिकॉर्ड थे, जिससे समय के साथ उनकी सेहत में आए बदलावों को समझा जा सका। इस रिसर्च में ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर (HbA1c), बीएमआई और कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर नजर रखी गई। नतीजों से पता चला कि लगभग 62% लोगों की सेहत के मुख्य संकेतों में 12 महीने के भीतर सुधार देखा गया। वहीं, 37% लोग जो पहले हाई-रिस्क वाली श्रेणी में थे, वे कम या मध्यम खतरे वाली श्रेणी में आ गए। इससे यह साफ जाहिर होता है कि लगातार हेल्थ मॉनिटरिंग और समय पर ध्यान देने से सेहत को काफी बेहतर बनाया जा सकता है।
इस रिसर्च में मुख्य बीमारियों और हेल्थ इंडिकेटर्स में भी अच्छे सुधार देखने को मिले। 32% मामलों में ब्लड प्रेशर में सुधार हुआ, 33% मामलों में शुगर (डायबिटीज) का स्तर सुधरा, 34% मामलों में बीएमआई और मोटापे में कमी आई, और 17% ग्राहकों के कोलेस्ट्रॉल लेवल में सुधार दर्ज किया गया।
रिसर्च के नतीजों पर बोलते हुए आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस के सीईओ, मयंक बथवाल ने कहा, “जैसे-जैसे स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतें बदल रही हैं, हमारा ध्यान सिर्फ अस्पताल में भर्ती होने के समय पर ही नहीं, बल्कि पूरी इलाज यात्रा के दौरान सेहत को बेहतर बनाने पर होना चाहिए। इस रिसर्च से यह साफ पता चलता है कि अगर लगातार मॉनिटरिंग और बीमारियों से बचाव के कदम उठाए जाएं, तो पुरानी बीमारियों से जुड़े


