श्री सीमेंट इस साल 100 इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहन करेगी चालू, खनन में भी ईवी इस्तेमाल की तैयारी
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान नई दिल्ली
नई दिल्ली। श्री सीमेंट लिमिटेड ने चालू वर्ष में करीब 100 इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों को अपने परिचालन में शामिल करने की योजना बनाई है। कंपनी का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को अधिक स्वच्छ, कुशल और लागत प्रभावी बनाना है।
कंपनी परिवहन के साथ-साथ खनन कार्यों में भी इलेक्ट्रिफिकेशन की संभावनाएं तलाश रही है। इसके तहत इलेक्ट्रिक डंपर और डोजर जैसे वाहनों के इस्तेमाल का मूल्यांकन किया जा रहा है।
श्री सीमेंट के मुताबिक, पिछली तिमाही में उसके कुल ऊर्जा मिश्रण में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 61 प्रतिशत से बढ़कर 66 प्रतिशत हो गई। कंपनी ने चुनिंदा स्थानों पर छोटे स्तर पर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) का इस्तेमाल भी शुरू किया है, ताकि भविष्य में इसके व्यापक उपयोग की संभावनाओं का आकलन किया जा सके।
कंपनी के प्रबंध निदेशक नीरज अखौरी ने कहा कि टिकाऊपन अब कंपनी के परिचालन की योजना और संचालन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। उनके मुताबिक, करीब 100 इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों को चालू करने की योजना के साथ खनन में इलेक्ट्रिफिकेशन और बैटरी स्टोरेज जैसे क्षेत्रों पर भी काम किया जा रहा है।
कंपनी ने दावा किया है कि इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों की ईंधन लागत तुलनीय डीजल वाहनों की तुलना में करीब दसवां हिस्सा हो सकती है। कंपनी के अनुसार, इससे लॉजिस्टिक्स परिचालन की लागत और दक्षता में सुधार की संभावना है।
लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कंपनी ने औसत लीड डिस्टेंस भी 459 किलोमीटर से घटाकर 445 किलोमीटर किया है। वहीं, कुल वॉल्यूम में रेल परिवहन की हिस्सेदारी करीब 9 प्रतिशत रही। कंपनी गेटी शक्ति ढांचे के तहत रेलवे साइडिंग परियोजनाओं पर भी काम कर रही है।
संसाधन संरक्षण के क्षेत्र में कंपनी का कहना है कि उसके विनिर्माण संयंत्रों में Zero Liquid Discharge व्यवस्था लागू है, जिसके तहत अपशिष्ट जल का उपचार कर दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। कंपनी के संयंत्रों में सीमेंट निर्माण के लिए ड्राई प्रोसेस का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें पारंपरिक वेट प्रोसेस की तुलना में पानी की जरूरत कम होती है।
श्री सीमेंट के मुताबिक, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, कुशल लॉजिस्टिक्स और संसाधन संरक्षण से जुड़े ये कदम कंपनी के परिचालन को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में जारी प्रयासों का हिस्सा हैं।


