
रक्त में कैंसर कोशिकाओं की पहचान के लिए स्वदेशी तकनीक को केंद्र सरकार की मंजूरी
पुणे की Actorius को CDSCO से मेडिकल डिवाइस लाइसेंस; जर्मनी और फ्रांस के वैज्ञानिकों के साथ डॉ. जयंत खंदारे का शोध
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान :पुणे महाराष्ट्र
पुणे, प्रतिनिधि। देश में कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच बीमारी की जल्द पहचान और उपचार की निगरानी को लेकर नई तकनीकों पर शोध जारी है। इसी क्रम में पुणे स्थित Actorius Innovations and Research Lab को Circulating Tumour Cells (CTCs) और Liquid Biopsy से संबंधित तकनीक के लिए भारत सरकार के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) से मेडिकल डिवाइस लाइसेंस प्राप्त हुआ है।
Actorius Innovations के अनुसार, कंपनी ने OncoDiscover® नामक CDSCO-मान्य इन-विट्रो डायग्नोस्टिक मेडिकल डिवाइस विकसित किया है। इसका उपयोग रक्त में मौजूद Circulating Tumour Cells (CTCs) की पहचान के लिए किया जाता है। कंपनी के मुताबिक, इसमें इम्यूनोमैग्नेटिक एनरिचमेंट और फ्लोरेसेंस माइक्रोस्कोपी जैसी तकनीकों का उपयोग कर रक्तप्रवाह में मौजूद ट्यूमर कोशिकाओं की पहचान की जाती है।
इस परियोजना से जुड़े मराठी मूल के शोधकर्ता डॉ. जयंत खंदारे ने जर्मनी और फ्रांस के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर CTCs और Liquid Biopsy के क्षेत्र में शोध किया है। कंपनी का कहना है कि स्वदेशी तकनीक के विकास से Liquid Biopsy के क्षेत्र में घरेलू तकनीकी क्षमता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
PET-CT के साथ पूरक जानकारी देने की क्षमता
कैंसर के उपचार के बाद मरीज की स्थिति की निगरानी के लिए PET-CT सहित विभिन्न जांचों का उपयोग किया जाता है। वहीं, CTC विश्लेषण रक्त में मौजूद ट्यूमर कोशिकाओं के बारे में अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है। हालांकि, इस तरह के अनुप्रयोगों की उपयोगिता और चिकित्सकीय निर्णयों में भूमिका के लिए उपयुक्त क्लिनिकल साक्ष्य आवश्यक होते हैं।
कंपनी के अनुसार, Next-Generation Sequencing (NGS) और CTC विश्लेषण को एक साथ उपयोग करने से ट्यूमर के जैविक स्वरूप, उपचार के प्रति प्रतिक्रिया और बीमारी की प्रगति से संबंधित अधिक व्यापक जानकारी प्राप्त करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
डॉ. जयंत खंदारे ने कहा कि PET-CT जैसी जांचों के बाद भी रक्त में कुछ ट्यूमर कोशिकाएं मौजूद हो सकती हैं और OncoDiscover® उनके अध्ययन के लिए पूरक जानकारी उपलब्ध करा सकता है। उनके अनुसार, स्वदेशी तकनीक से जांच को अधिक सुलभ बनाने तथा आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
भविष्य की तकनीक पर भी काम
Actorius के अनुसार, कंपनी CTCs से संबंधित एक अन्य तकनीक के विकास पर भी काम कर रही है, जिसका उद्देश्य मरीज के रक्त से CTCs को फिल्टर करने की संभावनाओं का अध्ययन करना है। हालांकि, इस तकनीक की चिकित्सकीय प्रभावशीलता और कैंसर के मेटास्टेसिस को रोकने या विलंबित करने संबंधी दावों के लिए आगे व्यापक शोध एवं क्लिनिकल प्रमाण आवश्यक होंगे।
जर्मनी के वैज्ञानिक डॉ. क्लाउस पैंटेल ने कहा कि उन्नत जांच तकनीकों को आम लोगों की पहुंच में लाना महत्वपूर्ण उद्देश्य है। फ्रांस की वैज्ञानिक डॉ. कैथरीन एलिक्स-पैनाबियरेस ने कहा कि बीमारी की स्थिति की शुरुआती जानकारी मिलने से उपचार की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
Actorius के अनुसार, दोनों वैज्ञानिक कंपनी के शोध सहयोगी हैं और उसकी प्रयोगशाला में विकसित हो रही तकनीकों के मूल्यांकन एवं शोध गतिविधियों से जुड़े हैं। पुणे स्थित कंपनी का यह शोध कैंसर निदान और प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।


