
इटावा में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई महर्षि वाल्मीकि जयंती
प्राचीन महर्षि वाल्मीकि मंदिर में दिव्य पूजन, वाल्मीकि रामायण पाठ और सुंदरकांड से भक्तिमय हुआ वातावरण
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान इटावा उत्तर प्रदेश
इटावा, । जनपद इटावा में महर्षि वाल्मीकि जयंती श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाई गई। इस अवसर पर बतख तलैया, कटरा शमशेर खां स्थित प्राचीन श्री श्री 1008 महर्षि वाल्मीकि मंदिर में दिव्य पूजन, वाल्मीकि रामायण पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 11:30 बजे भगवान महर्षि वाल्मीकि के विधि-विधान से पूजन-अर्चन के साथ हुआ। सदर विधायक श्रीमती सरिता भदौरिया ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर भगवान महर्षि वाल्मीकि का पूजन किया। इसके बाद वाल्मीकि रामायण का पाठ प्रारंभ हुआ। सुंदरकांड पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा।
कार्यक्रम में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ संत-महात्माओं ने भी सहभागिता की। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक कार्यक्रम संपन्न कराए गए। श्रद्धालुओं ने भगवान महर्षि वाल्मीकि के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
महर्षि वाल्मीकि को आदिकवि के रूप में जाना जाता है। रामायण की रचना के माध्यम से उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, मर्यादा, कर्तव्य और धर्म के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया। जयंती समारोह के माध्यम से उनकी महान साहित्यिक विरासत और विचारों को स्मरण किया गया।
जिले के अन्य मंदिरों में भी हुए धार्मिक आयोजन
महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन के तत्वावधान में जिले के अन्य धार्मिक स्थलों पर भी कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें जसवंतनगर स्थित महर्षि वाल्मीकि मंदिर, भरथना के रमायन स्थित श्री गंगाधर विश्वनाथ धाम मंदिर, इटावा की साईं विहार कॉलोनी स्थित श्री मारुति नंदन हनुमान मंदिर तथा चकरनगर के प्राचीन शिव मंदिर में संस्कृति विभाग के कलाकारों द्वारा संगीतमय सुंदरकांड, भजन और कीर्तन के कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इन आयोजनों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों के प्रति लोगों को जागरूक करने का संदेश दिया गया। श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुए कार्यक्रमों ने जयंती समारोह को विशेष बना दिया।



