आरोग्य

महाराष्ट्र में हर साल 5,000 बच्चे जन्म से ही बहरेपन का शिकार होते है-

महाराष्ट्र में हर साल 5,000 बच्चे जन्म से ही बहरेपन का शिकार होते है.
जन्म के समय जल्दी निदान किया जाना चाहिए
वर्ल्ड हियरिंग मंथ में कॉक्लिया पुणे फॉर हियरिंग एंड स्पीच सेंटर द्वारा – मुफ्त श्रवण जांच
जन्मजात श्रवण विणता भारत में एक गंभीर समस्या है, जो प्रति 1,000 समान्य जन्मों बच्चों में से 4 से 6 बच्चों को प्रभावित करती है, जिसका अर्थ है कि भारत में हर साल लगभग 1 लाख बच्चे बहरेपन के साथ पैदा होते हैं. महाराष्ट्र की बात करें तो लगभग 4500-5000 जन्मजात बधिर बच्चे पैदा होते हैं. 3 मार्च विश्व श्रवण दिवस है और कोक्लिया पुणे मार्च के पूरे महीने को श्रावण दिवस के रूप में मनाता है, जहां माता-पिता अपने नवजात शिशुओं या बच्चों को मुफ्त श्रवण जांच के लिए पुणे के कॉक्लिया पुणे फॉर हियरिंग एंड स्पीच सेंटर में ला सकते है.
शीघ्र निदान और ध्यान देने की आवश्यकता क्यों है-
बहरापन एक छिपी हुई विकलांगता है क्योंकि बच्चा शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह से सामान्य होता है. इस प्रकार, जब तक बहरेपन का निदान नहीं हो जाता, तब तक बच्चा 3-4 वर्ष का होता है. जन्मजात श्रवण हानि का भाषा और बोलचाल के विकास पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है, क्योंकि मानव मस्तिष्क केवल 6 वर्षों तक भाषा और बोलना सीखने की प्रवृत्ति रखता है.

यह बच्चे के सीखने, व्यक्तित्व, बोलचाल और सामाजिक कौशल को भी प्रभावित करता है.बहरेपन का उपचार न करने पर अक्सर शैक्षणिक सफलता में इसका दुष्परिणाम होता है , जिससे की आगे रोजगार के अवसर कम होते है जिसके कई भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक परिणाम भी होते हैं. जैसे अकेलापन, अवसाद आदि की भावनाएँ. इस प्रकार कम उम्र में समय रहते न केवल सुनने की कमजोरी के साथ जन्म लेनेवाले बच्चे पर प्रभाव पड़ता है बल्कि परिवार, समाज, राष्ट्र पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ता है.
मीडिया से बातचीत करते हुए ईएनटी सर्जन डॉ. अक्षय वाचासुंदर ने कहा, “1 महीने से कम उम्र के सभी बच्चों की सुनने के क्षमता की जांच होनी चाहिए. जन्म के बाद अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले उनकी जांच की जाए तो बेहतर है. जिसके लिए ओएई (OAE) परीक्षण किया जाता है. यदि शिशु ने यह सुनवाई परीक्षण पास नहीं किया, तो जल्द से जल्द पूर्ण श्रवण परीक्षण करवाना बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन 3 महीने के बाद नहीं. विशेष जोखिम वाले शिशुओं के लिए इसकी सलाह दी जाती है, उदाहरण के लिए, नवजात शिशु जो 5 दिनों से अधिक समय से नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट या जो वेंटिलेटर पर हैं, उनकी तुरंत जांच की जानी चाहिए. कम उम्र में ही बहरेपन का इलाज श्रवणयंत्र /कॉक्लियर इम्प्लांट्स और स्पीच थेरेपी से किया जा सकता है ताकि सुनने की क्षमता बढ़ सके.”
जन्मजात श्रवण हानि के शुरुआती लक्षण क्या है?
• बच्चा तेज आवाज से नहीं डरता
• बच्चा आवाज की ओर नहीं मुड़ता
• ‘मम्मा’, ‘दादा’ जैसे शब्द 1 साल की उम्र तक नहीं बोलता.
• बच्चा माँ के नाम से पुकारने पर कोई रिएक्शन नहीं देता , मां बच्चे की सुनने की समस्याओं को जल्दी नोटिस कर सकती है,
श्रवण हानि का संदेह होने पर क्या करें –
-अपने बाल रोग विशेषज्ञ से मिलें
-किसी ईएनटी सर्जन के पास जाएं
-ब्रेनस्टेम इवोक्ड रिस्पांस ऑडियोमेट्री (BERA), ऑटो एकॉस्टिक एमिशन (OAE) जैसे श्रवण परीक्षण करें.
जन्मजात बहरेपन का इलाज –
जन्मजात बहरेपन के उपचार श्रवण हानि की गंभीरता पर निर्भर करता है. मध्यम से थोडे गंभीर श्रवण हानि वाले बच्चों के लिए श्रवण यंत्र फायदेमंद होते हैं. कॉक्लियर इम्प्लांट नवीनतम पद्धति है और इसने श्रवण हानि के उपचार में क्रांति ला दी है. श्रवण यंत्र केवल ध्वनि को बढ़ाते हैं पर कॉक्लियर इम्प्लांट सुनने की एक वास्तविक क्षमता देते हैं , साथ ही विद्युत उत्तेजना का उपयोग करते हुए आपको कान के क्षतिग्रस्त हिस्से से गुजरते हुए ध्वनि को सुनने में सक्षम बनाते हैं. कॉक्लियर इम्प्लांट लिप रीडिंग बिना ही सुनने और समझने में मदद करता है. श्रवण चिकित्सा के साथ कॉक्लियर इम्प्लांट भी बच्चों की भाषण स्पष्टता में सुधार करता है.
कॉक्लिया पुणे फॉर हियरिंग एंड स्पीच सेंटर और मोरया हॉस्पिटल के कार्य-

हमारे केंद्र की विशेषता यह है कि हम अपनी संस्था में श्रवण बाधित बच्चों के उपचार और पुनर्वास के लिए एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करते हैं. श्रवण हानि को कम करने के लिए हमारी विशेषता एक छत के नीचे काम करना है. मोरया मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के सहयोग से, हमारे केंद्र ने 140 से अधिक कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक की हैं. मोरया हॉस्पिटल को एडीआईपी और आरबीएसके जैसी विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत शामिल किया गया है जो कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के लिए फंड उपलब्ध कराने में मदद करता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए मुफ्त कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी करना आसान हो जाता है. जिसकी कीमत आमतौर पर रु. 70000 है, जो कि गंभीर श्रवण हानि वाले बच्चों के लिए लाभकारी है.

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