पूणे

महाराष्ट्र की भूमि ही विश्व शांति की राह दिखाऐगी घुमंतू जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष दादा इदाते के विचारः ८वे वर्ल्ड पार्लमेंट का शुभारंभ

महाराष्ट्र की भूमि ही विश्व शांति की राह दिखाऐगी
घुमंतू जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष दादा इदाते के विचारः ८वे वर्ल्ड पार्लमेंट का शुभारंभ

पुणे: सारी मानवजाति लढाई और दुविधा स्थिति से गुजर रही है. ऐसे समय अध्यात्म ही उन्हें मन शांति दे सकता है. एक ओर महाराष्ट्र को संतों की भूमि कही जाती है. अब इस भूमि के संत ज्ञानेश्वर महाराज और तुकाराम महाराज के विचार ही संपूर्ण मानव जाति को शांति की राह पर ले जाएंगे. यह विचार बतौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित घुमंतू जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष दादा इदाते ने रखे.
माईर्स एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी और एमआईटी आर्ट, डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी, राजबाग, पुणे के संयुक्त रुप से विश्व शांति के सबसे बडे गुम्बद में आयोजित ८वीं वर्ल्ड पार्लमेंट के शुभारंभ मौके पर कहा.
इस मौके पर विश्व विख्यात कंप्यूटर विशेषज्ञ पदमभूषण डॉ.विजय भटकर, वरिष्ठ वैज्ञानिक पद्मविभूषण डॉ. रघुनाथ माशेलकर, अयोध्या स्थित श्रीराम जन्म भूमि के न्यास के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रामविलास वेदांती और महंत रामदास सम्माननीय अतिथि के रूप में उपस्थित थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने निभाई.
इस मौके पर एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के कार्यकारी अध्यक्ष राहुल विश्वनाथ कराड, एमआईटी एडीटी यूनिवर्सिटी के कार्याध्यक्ष प्रो.डॉ. मंगेश तु. कराड, प्रा. स्वाती कराड चाटे, डॉ. सुचित्रा कराड नागरे, एमआईटी डब्ल्यूपीयू के कुलपति डॉ. आर.एम.चिटणीस और प्र. कुलपति डॉ. मिलिंद पांडे उपस्थित थे.
दादा इदाते ने कहा, सभी संतों ने अपनी विचारधारा से मानवजाति की भलाई की है. आज भी उनके राह पर चलने से सबका भला होगा. संतों के जीवन से हमेशा ही प्र्रेरणा मिलती है. आधुनिक वैज्ञानिक युग में अध्यात्मिकता में जो कुछ लिखा है वह आज के समय सहीं साबीत हो रहा है. दुनिया के सारे खोज अध्यात्म में ही दिखाई देते है. हमें दुर्बल लोगों की सेवा करना चाहिए. हर एक व्यक्ति को धर्म की आवश्यकता है
डॉ. रघुनाथ माशेलकर ने कहा, यह गुम्बद अध्यात्मिक शक्ती से परिपूर्ण होने के साथ साथ यहां से सारी दुनिया को शांति का संदेश दिया जा रहा है. महात्मा गांधी और आईनस्टाइन की विचारधारा से ही विश्व में शांति स्थापित हो सकती है. वर्तमान दौर में रशिया और युक्रेन की लढाई ने मानवजाति के दिलों की धडकनों को बढा दिया है. समाज में शांति भंग करनेवाली घटनाएं आए दिन बढती ही जा रही है. वहीं कर्नाटक में हिजाब परिधान और लोगों के खाने पीने के मुद्दों जैसे कई घटनाएं बढती जा रही है. यहां से १.२५ लाख श्रीमद् भगवद् गीता का वितरण करना एक महान घटना है. गीता में शाश्वत तकनीक का सारांश है. गीता वह शास्त्र है जिसमें आचार, विचार और मूल्य संवर्धन यह जीवन का सार बतानेवाला शास्त्र है.
डॉ. विजय भटकर ने कहा, इस सृष्टी पर करोड लोग निवास करते है. लेकिन वे सभी शांति की तलाश में है. ऐसे में इस सम्मेलन से संपूर्ण मानवजाति को कल्याण की राह दिखाई जाएगी. आनेवाले समय में विज्ञान, धर्म और दर्शन के आधारपर शांति प्रस्थापित होगी. होलिस्टीक विश्व निर्माण के लिए सभी को आगे आने की जरूरत है. अध्यात्म की राह पर चलने से ही सत्य की अनुभूति मिलती है.
डॉ. विश्वनाथ कराड ने कहा, विश्वशांति, सुख, समाधान और मानव कल्याण यह बाते सभी धर्मों के सार में आता है. धर्म ही जीवन जीने की कला सिखाती है. श्रध्दा को अंधश्रध्दा का जोड देना उचित नहीं है. धर्म केवल संकल्पना नहीं बल्कि विश्वकल्याण की गाथा है. आयोजित धर्म सम्मेलन से सारी दुनिया को अध्यात्म और विश्व शांति का संदेश दिया जाएगा.

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