
विशाल समाचार रीवा एमपी
बांस मिशन के तहत जवा में एक दिवसीय कार्यशाला संपन्न
बांस का रोपण लंबे समय तक नियमित आमदनी देने वाला व्यवसाय है – वन मण्डलाधिकारी
रीवा एमपी: रीवा जिले में एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत बांस रोपण का कार्य चयनित किया गया है। वन विभाग द्वारा संचालित बांस मिशन में भी रीवा जिले को शामिल किया गया है। किसानों को बांस रोपण के लिए प्रेरित करने के लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। इसके तहत जिला प्रशासन तथा वन विभाग द्वारा जिला एवं विकासखण्ड स्तर पर कार्यशालाएें आयोजित की जा रही है। इस क्रम में जवा में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गयी। कार्यशाला का शुभारंभ वन मण्डलाधिकारी चन्द्रशेखर सिंह ने किया। कार्यशाला में एसीएफ नरेन्द्र त्रिपाठी तहसीलदार चन्द्रमणि सोनी जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अरूण भारद्वाज, रेंजर सुभम दुबे, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।
कार्यशाला में वन मण्डलाधिकारी ने कहा कि बांस का रोपण लंबे समय तक नियमित आमदनी देने वाला व्यवसाय है। एक बार रोपण करने के बाद तीन साल तक इसके देखभाल की जरूरत होती है। इसके बाद रोपण के पांच वर्ष से बांस रोपण से लाभ मिलने लगता है जो लगभग 40 वर्षों तक लगातार बिना किसी खर्चे के मिलता है। एक हेक्टेयर में बांस लगाने पर पांचवें वर्ष दो लाख 75 हजार रूपये छटवें वर्ष 4 लाख 50 हजार रूपये के बांस प्राप्त होते हैं। एक हेक्टेयर में 625 बांस लगाये जाते हैं। रीवा जिले की मिट्टी तथा वातावरण बांस की खेती के लिए अनुकूल है। रीवा जिले के लिए बांस की तीन प्रजातियां बम्बुसा-बालकुवा, कटंग तथा बम्बुसा टुल्डा उपयुक्त हैं। बांस रोपण के लिए वन विभाग द्वारा प्रथम वर्ष में प्रति पौधा 36 रूपये अनुदान दिया जाता है। पौधे के जीवत रहने पर 4 माह में 24 रूपये दिये जाते हैं। तीन वर्षों में प्रति पौधा 120 रूपये अनुदान दिया जाता है।
वन मण्डलाधिकारी ने बताया कि रोपण के लिए वन विभाग रीवा में पौधे उपलब्ध हैं। इसके अलावा टिसू कल्चर प्रयोग शाला में तैयार पौधे भी अन्य जिलों से संपर्क करके किसानों को उपलब्ध करायें जायेंगे। इन पौधों की कीमत प्रति पौधा 30 रूपये है। इसकी पूर्ति वन विभाग द्वारा दिये जा रहे 36 रूपये के अनुदान से हो जाती है। कार्यशाला में बांस के उद्योगों में उपयोग, फर्नीचर निर्माण, प्लाई तथा कागज निर्माण एवं सजावटी समान निर्माण के संबंध में जानकारी दी गयी। कार्यशाला में बांस की प्रमुख प्रजातियों, बांस की खेती के तकनीकी पक्षों तथा बांस रोपण के लाभों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गयी।


