
अध्ययन और विश्लेषणण के बल पर होती प्रगति केंद्रीय राज्यमंत्री जनरल डॉ. वी.के.सिंग के विचार मिटसॉग की १४ वीं और १५ वीं बैच का दीक्षांत समारोह
पुणे : अध्ययन और विश्वेलषण इन दो सिद्धांतों के बल पर कोई भी हमेशा प्रगति की सीढी चढ सकता है. अगर हम देश और समाज को ध्यान में रखकर काम करें तो आने वाले सालों में राजनीति में बडे बदलाव देखने को मिलेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकास नीति बनाकर देश के अंतिम व्यक्ति तक अपनी पहुंच बनाई है. राजनीति में अपने व्यापक अध्ययन के कारण ही वे एक सफल नेता बने है. ऐसे विचार केंद्रीय सडक परिवहन, राजमार्ग और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जनरल डॉ. वी.के. सिंह ने किया.
एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के एमआईटी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट मास्टर्स प्रोग्राम के १४वें और १५ वें बैच का दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद हॉल में हुआ. उस समय वे मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे.
मिजोरम के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति अध्यक्ष के रूप में उपस्थित थे. विशेष अतिथि के रूप में सांसद गजानन कीर्तिकर उपस्थित थे. इस मौके पर एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के संस्थापक अध्यक्ष प्रो.डॉ. विश्वनाथ दा. कराड, माईर्स एमआईटी के संस्थापकीय विश्वस्त प्रो.प्रकाश जोशी, एमआईटी डब्ल्यूपीयू के कार्यकारी अध्यक्ष राहुल विश्वनाथ कराड, कुलपति डॉ. आर.एम.चिटणीस, कुलसचिव डॉ. प्रशांत दवे, मिटसॉग के संचालक डॉ. के. गिरसन, प्रा. परिमल माया सुधाकर, परीक्षा विभाग के प्रमुख गणेश पोकले, डॉ. जयश्री कंभमपति और विदिशा गजानन कीर्तिकर उपस्थित थे. साथ ही धीरज सिंह, डॉ. शालिनी शर्मा व डॉ. सौरभ चतुर्वेदी मौजूद थे.
डॉ. वी.के.सिंह ने कहा, जिस तरह से सेना में जातिगत भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाता है, सेवा सबसे बडा धर्म है और एकता इन तीन गुणों के बल पर देश में सेना पर विश्वास है. अगर राजनीति में इस सिध्दांत का इस्तेमला किया जाए तो देश बदल जाएगा. इस क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करके सकारात्मक तरीके से काम करें. राजनीति में अच्छी और बुरी चीजें होती है और पैसा कमाने के चक्कर में न पडें. हमे हमेशा समाज और देश की आर्थिक स्थिति को पहचान कर काम करना चाहिए.

डॉ. हरि बाबू कंभमपति ने कहा, किसी भी क्षेत्र में प्रगति के लिए शिक्षा बहुत जरूरी है. एमआईटी शिक्षा संस्थान ने सभी स्कूल खोलकर उस जरूरत को पूरा कर रहा है. साथ ही राजनीतिक प्रशिक्षण संस्थान देश का भविष्य बदल देगा. लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए राजनेताओं के लिए प्रशिक्षण संस्थान खोले जाने चाहिए. राजनीति में ३५ साल से कम उम्र के ३२ नए सांसदों का चुनना एक अच्छा संकेत है. युवाओं के लिए अंतर संसदीय युवा आईपीयू शुरू किया गया है.
गजानन कीर्तिकर ने कहा, सबसे बडे लोकतंत्र को शिक्षित नेता मिले तो यह देश बदल जाएगा. यदि नेता का पीए प्रशिक्षित है और वह मिटसॉग की टीम का छात्र है, तो यह अच्छा काम करेगा. मिटसॉग के छात्र गौरव कलंबर के दम पर राजनीति में काफी काम कर रहा हूं. प्रशिक्षित राजनीति की मदद से देश में कई समस्याओं का समाधान किया जा सकता है.

प्रो.डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा, धर्म कर्तव्य की भावना देता है. इसलिए छात्रों को माता पिता, समाज ओर देश के प्रति अपने कर्तव्य को समझना चाहिए. नेतृत्व विकास प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद आपको अपने कर्तव्यों को कभी नहीं भूलना चाहिए. विश्व शांति के लिए बनाया गया सबसे बडा गुंबद अध्यात्म की प्रयोगशाला है. जीवन में सब कुछ संतुलित होना चाहिए.
राहुल विश्वनाथ कराड ने कहा, देश का भविष्य बदलने के लिए शिक्षा बहुत जरूरी है. शिक्षित युवा राजनीति में आएंगे तो देश आगे बढेगा. इस उद्देश्य के लिए मिटसॉग की स्थापना की गई थी. अब औपनिवेशिक मानसिकता को बदलने और भारतीय संस्कृति के मूल सिध्दांतो को स्वीकार करने का समय है. साथ ही सभी छात्रों को एनसीसी की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए. मिटसॉग के मंच से भारतीय छात्र संसद, राष्ट्रीय महिला संसद, राष्ट्रीय टीचर्स कांग्रेस जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से देश में एक नया आंदोलन खडा हो रहा है.
१४ वे और १५ वें बैच के छात्रों का स्नातक समारोह गणमान्य व्यक्तियों के हाथों संपन्न हुआ. इस बैच में संदीप बी, सार्थक साउजी, मुथुरासन, स्नेहल देसाई, जूडा जेबा कुमार और प्रवीण कुमार झा को विशेष सम्मान किया गया. यहां पर कुल ३८ छात्रों को डिग्री प्रदान की गई.
इस अवसर पर छात्र वैभव नलगुंडवार, संभल झा और जयंती ने अपने विचार रखे.
डॉ. आर.एम.चिटणीस ने प्रस्तावना रखी. डॉ. के. गिरिसन ने स्वागत पर भाषण दिया. प्रा. परिमल माया सुधाकर ने १४ वीं और १५ वीं बैच की वार्षिक रिपोर्ट पढी.
डॉ. अनुराधा पै ने सूत्रसंचालन और गणेश पोकले ने आभार माना.


