आगराविचार

बीते कई दिनों से हो रही रामलीला में श्रीराम स्वरूप बने योगी धाकरे..!

बीते कई दिनों से हो रही रामलीला में श्रीराम स्वरूप बने योगी धाकरे जो कि राजस्थान में वैज्ञानिक अधिकारी पद पर कार्यरत होते हुए अपना कीमती समय निकाल कर दो वर्षों से श्री रामलीला में मंचन कर रहे है योगी धाकरे ने बताया कि श्रीराम हमारे एक आदर्श भगवान के रूप मे हुए जिन्होंने भारत ही नही सम्पूर्ण मानव-जाति को ज्ञान तथा आदर्श का पाठ पढाया। मर्यादा पुरुषोत्तम राम जी का मानना था कि मनुष्य सिर्फ कर्म करने के लिए गतिशील होता है ,उसे उसके फल की कामना नही करनी चाहिए।क्योंकि जहां फल की कामना होती है।वहां फिर ज्ञान शून्य हो जाता है।
हमे अपने स्वार्थ या भूख मिटाने के लिए दूसरे प्राणी का हनन नही करना है।बल्कि सभी प्राणियों मे ईश्वर का स्वरूप देखकर उसकी सेवा करनी चाहिए।यही आदर्श भगवान राम के रहे है।
1- कर्तव्य निष्ठ
श्रीराम जी मर्यादा पुरुषोत्तम माने जाते है। उन्होने अपने कर्व्यों का निर्वाहन करते हुए समस्त सांसारिक भोग विलासों का त्याग किया। पिता की आज्ञों का पालन करना चाहे पथ में कितने ही कष्ठ और विपदाओं का सहन करना पढे वह सब राम ने किया।

2- श्री राम जी का आचरण
श्रीराम जी मधुर स्वभाव एवं सरस भाषी थे, परंतु आज समाज में लोगों के आचरण में मिलावट आ गई है। ऐसे में हमें भगवान राम के आचरण से पवित्रता सीखनी चाहिए,

3- माता-पिता का सम्मान करना
भगवान श्री राम जी ने खुद कहा है कि कोई भगवान नही होता है,अगर होता है तो उसके स्वरूप माता-पिता ही है। श्रीराम जी ने अपने पिता दशरथ और माता कैकेयी के द्वारा 14 वर्ष का वनवास दिए जाने पर श्री राम ने उनसे एक भी सवाल न करते हुए उनकी आज्ञा का पालन किया।

4- भ्रातृ प्रेम
राम जी ने अपने भाइयों के प्राति अपनी निष्ठा से संबंधों को प्रतिकूलता दी, वो चाहते तो चौदह वर्ष वनवास के बाद वह सीधे आ करके राजगद्दी संभाल सकता था। लेकिन उनके मन मे भाई का प्रेम

5- गुरु का आदर करना
श्रीराम का मानना था की इस संसार मे माता पिता के बाद, गुरू ही भगवान है, वही अंधकार को मिटाकर प्रकाशित करते है। गुरु का स्थान व्यक्ति के जीवन में सबसे बड़ा होता है, उस महत्व का शायद ही कोई विवेचना भी नही कर सकता। इनके मार्गदर्शन के बिना जीवन में सफलता हासिल करना बहुत कठिन होता है। गुरू ही मोक्ष का मार्ग भी दिखाते है और संसार को देखने का नजरिया भी स्थापित कराते है।

7- धैर्य का होना
धैर्य का होना हमारे जीवन मे महत्वपूर्ण है, धैर्य नही है तो न उसका निर्माण हो पाएगा और न ही वह देश का निर्माण कर सकता है। श्रीराम जी से सीखने की जरूरत है, रामायण को अच्छे से जानने पर पता चलता है कि श्री राम ने अपने जीवन कठिन से कठिन परिस्थिति में अपना धैर्य नहीं खोया ।अडिग रहे और अपने कर्म को ही फोकस किया, हर परेशानी में उन्होनें धैर्य से काम लिया। धैर्य होगा तो सभी कार्य सफल हो सकते है,और मानवता का भी अस्तित्व बचा रहेगा अन्यथा विनाश होने में देर नही होगी।

8- किस्मत को अपनाना
राम जी का मानना था कि भाग्य होता है किन्तु तभी भाग्य भी साथ देगा जब आप उसे पाने के लिए गतिशील रहोगे। श्री राम चाहते तो अपनी नियति को बदल सकते थे क्योंकि वो भगवान थे परंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया बल्कि उसके स्वीकार किया और उसका डटकर सामना किया। लेकिन उन्होने संदेश दिया कि दुनिया मे कर्म करने से ही भाग्य और निखर जाता है इसीलिए कर्म करो फल की इच्छा मत रखो।
यह अविनाशी जीवन ( अंडज, स्वेज, जरायु, और उद्भिज्ज, ) चार खानों मे खानों और चौरासी लाख योनियों मे विचरण करता है।जो व्यक्ति मोह माया भेद समय को व्यतीत करता है वह फिर से इसी जीवन मे विचरण करता रहता है।
9. भक्ति की महिमा
भक्ति की महिमा वही बखान कर सकता है जिसके हृदय मे अपने स्वामी के प्रति अथाह प्रेम तथा आदर्श छिपा हुआ हो। भक्ति का मार्ग सुखद होता है यह अमृत की खान है जो इसमे एक बार डूब जाता है, उसे फिर सांसारिक सुखों की परवाह नही रहती है।
10. ज्ञान का उद्देश्य
ज्ञानी होना कठिन नही है पर ज्ञान का विस्तार करना बहुत ही कठिन कार्य है। क्योंकि यह उसे ही प्राप्त होता है जिसके हृदय मे ईश्वर का वास हो और वही ज्ञान उसका भविष्य तय करता है।

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