
अभंग प्रभु’ की मदद से रिक्शा ड्राइवर का बेटा
बनेगा डॉक्टर!
सामाजिक जिम्मेदारी के तहत डॉ. अभंग प्रभू ने राज के फीस की ली जिम्मेदारी; तीन छात्राओं को एमबीबीएस के लिए छात्रवृत्ति
पुणे. अगर मन में इच्छाशक्ति हो और कुछ कर गुजरने की जिद हो तो उसके राह में कोई भी रोड़ा नही बन सकता. फिर चाहे गरीबी हो या ग्रामीण परिसर. उसे मंजिल जरूर मिलती है. इसकी मिसाल हैं राज गजानन दामधर. पिता रिक्शा ड्राइवर, मां आंगनवाड़ी सेविका. घर में पैसे का अभाव, बावजूद इसके उसने बड़ा हो कर डॉक्टर बनने की जिद नहीं छोड़ी. उसने परिश्रम शुरू किया. ऐसे में उसे साथ मिला डॉ. अभंग प्रभू का. जिनके मार्गदर्शन में उसने एमबीबीएसला प्रवेश के लिए नीट पास कर ली. अब उसकी डॉक्टरी की राह आसान हो गई है. इसकी झलक राज के साथ ही उनके मां-बाप कि चेहरे पर साफ ही झलक रही थी. अभंग प्रभू के मेडिकल अकेडमी राज की डॉक्टरी की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाएगा.
‘नीट’ परीक्षा में 607 अंक हासिल किए
राज की सफलता की कहानी मशहूर प्रसूतिरोग व स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. अभंग प्रभू के बिना अधूरी है. सामाजिक जिम्मेदारी के तहत एकेडमी (एपीएमए) के संस्थापक संचालक डॉ. अभंग प्रभू ने साल भर पहले राज दामधर की आर्थिक परिस्थिति को देखते हुए उसकी मेहनत एवं काबिलियत को देखते हुए उसे अपने एकेडमी में प्रवेश दिया. बदले में शर्त यह रखी कि 50 हजार की अनामत राशि उनके पास रखें और परिश्रम से पढ़ाई कर ‘नीट’ परीक्षा में 600 से अधिक अंक हासिल करना. अगर राज ऐसा करता है तो उसे वह राशि फिर से वापस कर दी जाएगी. राज ने अपने गुरू डॉ. प्रभू का विश्वास सार्थक साबित किया. उसने ‘नीट’ परीक्षा में 607 अंक हासिल किया. इससे खुश डॉ. प्रभू ने अनामत राशि वापस करने के साथ ही राज की एमबीबीएस के चार साल की फीस भरने का बीड़ा उठाया है.
राज की सफलता की कहानी मशहूर प्रसूतिरोग व स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. अभंग प्रभू के बिना अधूरी है. सामाजिक जिम्मेदारी के तहत एकेडमी (एपीएमए) के संस्थापक संचालक डॉ. अभंग प्रभू ने साल भर पहले राज दामधर की आर्थिक परिस्थिति को देखते हुए उसकी मेहनत एवं काबिलियत को देखते हुए उसे अपने एकेडमी में प्रवेश दिया. बदले में शर्त यह रखी कि 50 हजार की अनामत राशि उनके पास रखें और परिश्रम से पढ़ाई कर ‘नीट’ परीक्षा में 600 से अधिक अंक हासिल करना. अगर राज ऐसा करता है तो उसे वह राशि फिर से वापस कर दी जाएगी. राज ने अपने गुरू डॉ. प्रभू का विश्वास सार्थक साबित किया. उसने ‘नीट’ परीक्षा में 607 अंक हासिल किया. इससे खुश डॉ. प्रभू ने अनामत राशि वापस करने के साथ ही राज की एमबीबीएस के चार साल की फीस भरने का बीड़ा उठाया है.
एकेडमी के 20 विद्यार्थियों का किया गया सत्कार
राज के साथ एकेडमी के अन्य 20 उत्तीर्ण विद्यार्थियों का सत्कार किया गया. इस समय राज के पिता गजानन दामधर, मां प्रमिला दामधर, एपीएमए’ के संचालक प्रा. सचिन हलदवणेकर, संचालिका डॉ. हिमानी तपस्वी, समुपदेशिका डॉ. शीतल श्रीगिरी, डॉ. राजेश देशपांडे आदि उपस्थित थे. इस समय डॉ. प्रभू ने इस साल से तीन गरीब व जरूरतमंद छात्राओं के लिए एमबीबीएस की छात्रवृत्ति देने की घोषणा की. डॉ. अभंग प्रभू ने कहा कि पिछले 22 साल से ‘एपीएमए’ डॉक्टर बनाने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का काम करता आया है. मुंबई, सांगली एवं पुणे में ‘एपीएमए’ कार्यरत है. पुणे शाखा में इस साल लगभग 750 विद्यार्थी ‘नीट’ परीक्षा में मार्गदर्शन ले रहे हैं. चिकित्सकीय क्षेत्र में डॉक्टरी करनेवाले एवं विशेषज्ञ शिक्षक इन विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हैं. एमबीबीएस के लिए पात्र होनेवाले विद्यार्थियों में सबसे अधिक प्रमाण ‘एपीएमए’ की खासियत है. राज की ही तरह गरीब व जरूरतमंद छात्राओं को प्रोत्साहन व आधार देने के लिए तीन लड़कियों को एमबीबीएस की फीस ‘एपीएमए’ भरेगा.”
राज के साथ एकेडमी के अन्य 20 उत्तीर्ण विद्यार्थियों का सत्कार किया गया. इस समय राज के पिता गजानन दामधर, मां प्रमिला दामधर, एपीएमए’ के संचालक प्रा. सचिन हलदवणेकर, संचालिका डॉ. हिमानी तपस्वी, समुपदेशिका डॉ. शीतल श्रीगिरी, डॉ. राजेश देशपांडे आदि उपस्थित थे. इस समय डॉ. प्रभू ने इस साल से तीन गरीब व जरूरतमंद छात्राओं के लिए एमबीबीएस की छात्रवृत्ति देने की घोषणा की. डॉ. अभंग प्रभू ने कहा कि पिछले 22 साल से ‘एपीएमए’ डॉक्टर बनाने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का काम करता आया है. मुंबई, सांगली एवं पुणे में ‘एपीएमए’ कार्यरत है. पुणे शाखा में इस साल लगभग 750 विद्यार्थी ‘नीट’ परीक्षा में मार्गदर्शन ले रहे हैं. चिकित्सकीय क्षेत्र में डॉक्टरी करनेवाले एवं विशेषज्ञ शिक्षक इन विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हैं. एमबीबीएस के लिए पात्र होनेवाले विद्यार्थियों में सबसे अधिक प्रमाण ‘एपीएमए’ की खासियत है. राज की ही तरह गरीब व जरूरतमंद छात्राओं को प्रोत्साहन व आधार देने के लिए तीन लड़कियों को एमबीबीएस की फीस ‘एपीएमए’ भरेगा.”
बेहतर डॉक्टर बन कर दिखाएगा
राज रामधर ने डॉ. अभंग प्रभू व अन्य शिक्षकों का आभार जताया. उसने कहा कि पुणे के आंबेगाव पठार में वह रहता है. उसके पिता पिछले 25 साल से रिक्शा चलाते हैं. मां निजी आंगनवाड़ी सेविका है. पहली बार ‘नीट’ में यूकने के बाद उसने ‘एपीएमए’ के पास तैयारी की. डॉ. प्रभू ने फीस माफ की. उनके उत्तम मार्गदर्शन व अध्ययन के बल पर उसे 607 अंक नीट में मिले. अब वह मेहनत कर अच्छा डॉक्टर बनेगा. इस समय डॉ. हिमानी तपस्वी ने कहा कि छात्रवृत्ति के लिए पात्र छात्राओं के आवेदन मंगाजए जा रहे हैं. प्रा. सचिन हलदवणेकर भी इस समय उपस्थित थे.
राज रामधर ने डॉ. अभंग प्रभू व अन्य शिक्षकों का आभार जताया. उसने कहा कि पुणे के आंबेगाव पठार में वह रहता है. उसके पिता पिछले 25 साल से रिक्शा चलाते हैं. मां निजी आंगनवाड़ी सेविका है. पहली बार ‘नीट’ में यूकने के बाद उसने ‘एपीएमए’ के पास तैयारी की. डॉ. प्रभू ने फीस माफ की. उनके उत्तम मार्गदर्शन व अध्ययन के बल पर उसे 607 अंक नीट में मिले. अब वह मेहनत कर अच्छा डॉक्टर बनेगा. इस समय डॉ. हिमानी तपस्वी ने कहा कि छात्रवृत्ति के लिए पात्र छात्राओं के आवेदन मंगाजए जा रहे हैं. प्रा. सचिन हलदवणेकर भी इस समय उपस्थित थे.


