
मधुमेह चिकित्सा में भारत दुनिया को मार्ग दिखा सकता है – डॉ.व्ही मोहन
चेलाराम डायबेटिस इन्स्टिट्युट कि ओर से आयोजित ९ वे आंतरराष्ट्रीय मधुमेह परिषद को बड़ा प्रतिसाद
,:भारत में हम स्वेदशी बनावट के किफायती वैद्यकीय उपकरण ,मॉलिक्युल्स, थेरपीज् को विकसित करके वह दुनिया को दे सकते है. मधुमेह चिकित्सा में दुनिया को मार्ग दिखाने का सामर्थ्य भारत में है, ऐसी राय मद्रास डायबेटिस रिसर्च फाऊंडेशन के अध्यक्ष एवं डॉ.मोहनस् डायबेटिस स्पेशालिटिज सेंटर,चेन्नई के अध्यक्ष डॉ.व्ही मोहन ने व्यक्त कि. चेलाराम डायबेटिस इन्स्टिट्युट की ओर से पुणे में जे.डब्ल्यू. मॅरिएट में हालही में ९ वे आंतरराष्ट्रीय मधुमेह परिषद – २०२५ (इंटरनॅशनल डायबेटिस समिट) का आयोजन किया गया था. इस परिषद के उद्घाटन के दौरान स्वीडन के कॅरोलिन्स्का इन्स्टिट्युट में प्रा.डॉ.सी.व्ही.संजीवी, युके नॅशनल इन्स्टिट्युट फॉर हेल्थ रिसर्च (एनआयएचआर) के संचालक और सेंटर फॉर एथनिक हेल्थ रिसर्च के संचालक और द रिअल-वर्ल्ड एव्हिडन्स युनिट के संचालक डॉ.कमलेश खुंटी, चेलाराम फाऊंडेशन के उपाध्यक्ष डॉ.प्रकाश भुपटकर, चेलाराम डायबेटिस इन्स्टिट्युट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. उन्नीकृष्णन ए.जी., चेलाराम डायबेटिस इन्स्टिट्यूट के मुख्य वैद्यकीय अधिक्षक एवं विंग कमांडर (डॉ.) हर्षल मोरे (निवृत्त) और वैद्यकीय सेवा विभाग के प्रमुख डॉ.वेदवती पुरंदरे इत्यादी मान्यवर उपस्थित थे. इस समय डॉ.व्ही मोहन इनको मधुमेह क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण कार्य के लिए जीवनगौरव पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
डॉ.व्ही मोहन ने कहा की, ज्ञान ये प्रकाश जैसे होता है और उसका प्रसार होता रहता है. इस परिषद की माध्यम से सालों साल वही हो रहा है. यह वर्तमान काल भारत के लिए जरूरी है. भारत का औषध निर्मिती क्षेत्र जेनरिक और गुणवत्ता के बारे में दुनिया में अग्रणी है. हमारी जरूरत के हिसाब से हम स्वदेशी बनावट के किफायती वैद्यकीय उपकरण ,मॉलिक्यूल्स, थेरपीज् को विकसित कर सकते है. मधुमेह चिकित्सा दुनिया को मार्ग दिखाने का सामर्थ्य भारतीय वैद्यकीय क्षेत्र में है, ऐसा विश्वास उन्होंने व्यक्त किया.
प्रा.डॉ.सी.व्ही.संजीवी ने कहा की, भारत में मधुमेहींओ की संख्या तेजी से बढ़ रही है. उसके अलावा मधुमेह से पहले पड़ाव में (प्रि डायबेटिक) संख्या भी लक्षणीय है. इसे कम करने के लिए जोखिम भरी घटकों का विचार करके वेलनेस इस संकल्पना पर ज्यादा से ज्यादा लक्ष केंद्रित करना चाहिए.
डॉ.कमलेश खुंटी ने कहा की, भारत में बड़े पैमाने पर नयी कल्पना सामने आ रही है ,ये सकारात्मक बात है .
डॉ.प्रकाश भुपटकर ने चेलाराम डायबेटिस इन्स्टिट्युट के अध्यक्ष श्री. लाल चेलाराम का संदेश पढ़ के दिखाया. भारत का संशोधन दुनिया के लिए संदर्भ बन सकता है, ऐसा उन्होंने व्यक्त किया.
मधुमेह और उससे निर्माण होने वाला मधुमेह का धोखा और जटिलता का सामना करने के लिए योग्य उपाय योजना जानने के उद्देश्य से इस परिषद का आयोजन किया गया था.
नामवंत भारतीय और आंतरराष्ट्रीय तज्ञो ने इस परिषद में बातचीत की. इस परिषद को २५०० से अधिक डॉक्टर्स उपस्थित थे .
९ वे आंतरराष्ट्रीय मधुमेह परिषद – २०२५ का उद्दिष्ट देश के आरोग्यसेवा में कार्य करनेवालों को मधुमेह और उनकी जटिलता के बारे में सर्वसमावेशक ज्ञान प्रदान करना था.


