
वैष्णवी हगवणे मौत प्रकरण: वकील विपुल दुशिंग की वकालत रद्द करने की बसपा की मांग
पुणे डीएस तोमर
महाराष्ट्र में चर्चित वैष्णवी हगवणे-कस्पटे मौत प्रकरण में नया मोड़ आया है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रदेश महासचिव और पश्चिम महाराष्ट्र ज़ोन के मुख्य प्रभारी डॉ. हुलगेश चलवादी ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया और बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा से मांग की है कि हगवणे परिवार के वकील एडवोकेट विपुल दुशिंग की वकालत की डिग्री (सनद) तत्काल रद्द की जाए।
वकील पर गंभीर आरोप
डॉ. चलवादी ने मंगलवार को बसपा पदाधिकारियों के साथ पीड़ित कस्पटे परिवार से मुलाकात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि बसपा उनके साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा, “एडवोकेट दुशिंग ने कोर्ट में वैष्णवी हगवणे के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और असंवेदनशील बयान दिए हैं। उन्होंने न्यायालय में वैष्णवी के चरित्र पर संदेह जताया और उनके आत्महत्या करने की प्रवृत्ति होने जैसे दावे किए हैं।”
दुशिंग के युक्तिवाद से समाज के विभिन्न वर्गों में आक्रोश फैल गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की नेता रोहिणी खड़से ने भी सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी, हालांकि बाद में उन्होंने अपनी स्थिति बदल ली।
वकील के खिलाफ पहले से दर्ज है मामला
जांच में यह भी सामने आया है कि एडवोकेट दुशिंग के खिलाफ 2022 में मारपीट का मामला दर्ज है। वडगांव मावल न्यायालय में एक मामले की सुनवाई के दौरान अगली तारीख को लेकर विवाद हो गया था। इस दौरान दुशिंग ने सरकारी वकील प्रेमकुमार अग्रवाल का कॉलर पकड़कर उन पर हमला किया था। इस घटना के बाद वडगांव मावल पुलिस स्टेशन में दुशिंग और दो अन्य वकीलों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, अदालत से अग्रिम जमानत मिलने के कारण उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सका था।
विवादित क्लाइंट्स का इतिहास
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दुशिंग के क्लाइंट्स में कई विवादित नाम शामिल हैं। गुंडा गजा मारणे, निलेश घायवळ, शाम दाभाड़े, सैफ अली खान पर हमला करने वाला शरीफुल और नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण करने वाले शिरुर के शिक्षक अनिल शेळके जैसे लोगों का प्रतिनिधित्व दुशिंग ने किया है।
डॉ. चलवादी ने कहा, “दुशिंग का व्यवहार न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। उनके तर्क न सिर्फ पीड़िता का अपमान करते हैं, बल्कि संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा दिए गए महिलाओं के सम्मान के अधिकार और मानवाधिकारों का भी अपमान करते हैं। वकीलों की भूमिका सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिकता से परिपूर्ण होनी चाहिए, लेकिन दुशिंग ने अपनी जिम्मेदारी का पूरी तरह उल्लंघन किया है।”
बसपा की इस मांग के बाद अब सबकी नजर बार काउंसिल के फैसले पर टिकी है। क्या वकील विपुल दुशिंग के खिलाफ कार्रवाई होगी, यह देखना बाकी है।



