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इंदिरा गांधी की शहादत पर दिन गिनकर तुलना करना बौद्धिक दिवालियापन और वैचारिक विकृति है–कांग्रेस प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी

इंदिरा गांधी की शहादत पर दिन गिनकर तुलना करना बौद्धिक दिवालियापन और वैचारिक विकृति है–कांग्रेस प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी

 

पुणे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रधानमंत्री पद पर 4078 दिन पूरे करने पर भाजपा के मुखपत्रों में उनकी प्रशंसा करते हुए ‘शहीद प्रधानमंत्री’ श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या से जुड़ी उनकी कार्यकाल अवधि की तुलना प्रधानमंत्री मोदी से की गई है। इसे लेकर कांग्रेस के राज्य प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि — “इस तरह की तुलना बौद्धिक दिवालियापन और वैचारिक विकृति का स्पष्ट प्रदर्शन है।”

 

उन्होंने आगे कहा कि “शहीद प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की दूरदर्शी नीतियों और राजनैतिक कूटनीतिक निर्णयों की तुलना मोदी के फैसलों से करना भी संभव नहीं है। कुछ चैनलों ने यह प्रयास अवश्य किया, लेकिन ‘नीतियों, निर्णयों और हासिल किए गए कार्यों’ की कसौटी पर मोदी कहीं भी श्रेष्ठ साबित नहीं हो सके।

 

तिवारी ने कहा कि “भाजपा नेता इस बात की ढिंढोरा पीट रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब इंदिरा गांधी के कार्यकाल दिनों की संख्या पार कर ली है। यह इस बात का प्रमाण है कि उनके पास उपलब्धियों की नहीं, केवल ‘दिन गिनने’ की राजनीति बची है, जो सीधे-सीधे बौद्धिक दिवालियापन है।”

 

गोपालदादा तिवारी ने कहा कि “जब श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या हुई, तब वे देश की वर्तमान प्रधानमंत्री थीं। अगर दुर्भाग्यवश वह शहादत नहीं हुई होती, तो उन्होंने अपने पिता पं. नेहरू के 17 वर्षों के कार्यकाल को पार कर लिया होता और देश पहले ही महासत्ता बन चुका होता — यह ऐतिहासिक सत्य है।”

 

उन्होंने याद दिलाया कि “श्रीमती इंदिरा गांधी के नेतृत्व में देश ने कृषि, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और उपग्रह तकनीक के क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की थी। देश की रक्षा और उत्पादन क्षमता को अभूतपूर्व ऊंचाई दी गई थी। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस आकाशवाणी और दूरदर्शन के ज़रिये ‘मन की बात’ करते हैं, वह इंदिराजी के ही शासनकाल की नींव है।”

 

गोपालदादा तिवारी ने दो टूक कहा कि “जब शहीद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी इस दुनिया से गए, तब यह केवल किसी व्यक्ति की मृत्यु नहीं थी — देश ने अपने वर्तमान प्रधानमंत्री को खोया था। पूरा देश रोया था। ऐसे में उनके कार्यकाल की केवल ‘दिवस संख्या’ गिनना एक अमानवीय और अनैतिक कृत्य है।”

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