फाइब ने पुणे के निवासियों के लिए शुरू की रूफटॉप सोलर फाइनेंसिंग योजन
पुणे: भारत के अग्रणी डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म फाइब ने अपने रूफटॉप सोलर फाइनेंसिंग सोल्यूशन को लॉन्च किया है। यह पहल खासतौर पर मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सौर ऊर्जा को सुलभ और किफायती बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। महाराष्ट्र सरकार रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय प्रयास कर रही है, और पुणे इस दिशा में अग्रणी शहर बनकर उभरा है, जहां अब तक 130 मेगावॉट की सौर क्षमता स्थापित की जा चुकी है।
शहर की बढ़ती जनसंख्या और निरंतर जागरूक होते नागरिकों की वजह से, पुणे में रूफटॉप सोलर को अपनाने की प्रक्रिया लगातार और तेज़ होती जा रही है। लोग अब पर्यावरण के प्रति पहले से कहीं अधिक जागरूक हो गए हैं, जिस कारण आने वाले समय में यहां सौर ऊर्जा को अपनाने की प्रक्रिया और अधिक तेज़ होने की उम्मीद है | फाइब ने पुणे और महाराष्ट्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करने और आसान पहुंच वाले फाइनेंसिंग सोल्यूशन प्रदान करने के लिए फ्रीयर एनर्जी और सोलर स्क्वायर से साझेदारी की है। देशभर में कंपनी पहले ही 100 से अधिक सोलर इंस्टॉलेशन कंपनियों के साथ काम कर रही है। अब उसका फोकस सोलर उत्पादकों और सेवा प्रदाताओं से साझेदारी कर ज्यादा से ज्यादा घरों तक पहुंचने पर है।
फाइब की यह पहल केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ को गति देने में भी मददगार साबित हो रही है। कंपनी का उद्देश्य उन लोगों तक सौर ऊर्जा और वित्तीय सहायता पहुंचाना है, जो अब तक इनसे वंचित रहे हैं। डिजिटल लेंडिंग क्षेत्र में फाइब उन शुरुआती कंपनियों में शामिल है जिन्हें सरकार के जन समर्थ पोर्टल पर सूचीबद्ध किया गया है। इसके चलते कंपनी अब रूफटॉप सोलर सिस्टम लगवाने के इच्छुक लोगों को आसान वित्तीय समाधान उपलब्ध कराने की बेहतर स्थिति में है।
जहां ज़्यादातर फाइनेंस कंपनियाँ बड़े या व्यावसायिक सोलर प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देती हैं, वहीं फाइब ने मध्यमवर्गीय परिवारों को ध्यान में रखते हुए एक खास सोलर लोन प्रोडक्ट लॉन्च किया है। इसके तहत ग्राहक बिना किसी ज़मानत के 5 लाख रुपये तक का लोन ले सकते हैं, जिसमें सोलर पैनल से लेकर इंस्टॉलेशन तक का पूरा खर्च शामिल है। यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पेपरलेस है, और केवल 15 मिनट में लोन की स्वीकृति मिल सकती है। इसमें न कोई फोरक्लोज़र चार्ज है और न ही कोई छिपा हुआ शुल्क — जिससे कर्ज लेने वालों को पूरी पारदर्शिता और सुविधा मिलती है।
यह सुविधा 19 से 60 वर्ष के वेतनभोगी और 23 से 65 वर्ष के स्वरोज़गार में लगे लोगों के लिए उपलब्ध है। खास बात यह है कि यदि आवेदक संपत्ति का स्वामी न हो, तो भी उसके खून के रिश्तेदार — जैसे माता-पिता, भाई-बहन आदि — तय मानदंडों को पूरा करते हुए इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। इससे संयुक्त या पारिवारिक मकानों में रहने वाले परिवारों को भी सौर ऊर्जा अपनाने का अवसर मिलेगा।
फाइब के सह-संस्थापक और ग्रुप सीईओ अक्षय मेहरोत्रा ने कहा, “छोटे शहरों में मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए रूफटॉप सोलर लगवाना अब तक काफी महंगा सौदा रहा है — यही सबसे बड़ी रुकावट रही है। हमारी नई सुविधा इसी समस्या का समाधान है, ताकि ज़रूरतमंद परिवार भी सौर ऊर्जा को अपना सकें। यह सरकार के एक करोड़ घरों तक सोलर पहुँचाने के मिशन से जुड़ा एक छोटा लेकिन अहम कदम है। हमें गर्व है कि हम भारत के लिए एक समावेशी और टिकाऊ भविष्य गढ़ने में योगदान दे पा रहे हैं।”
यह प्रयास भारत में हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक सशक्त पहल है। यह सुनिश्चित करता है कि छोटे शहरों और कस्बों में रहने वाले परिवार भी आसानी से सौर ऊर्जा का लाभ उठा सकें। फाइब का यह समाधान सस्ती, सुलभ और पारदर्शी फाइनेंसिंग के ज़रिए एक समावेशी और टिकाऊ भविष्य की नींव रखता है।



