
माता-पिता और बच्चों के बीच मित्रता से समृद्ध होता है पालन-पोषण: मृदुला भाटकर
‘क्रिसेंट’ द्वारा आयोजित सिंगल पेरेंट सम्मेलन उत्साह के साथ संपन्न
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे: माता-पिता बच्चों के केवल संरक्षक ही नहीं, बल्कि उनके भावनात्मक सहारा भी होते हैं। ऐसे में बच्चों के साथ मित्रतापूर्ण संबंध बनाए रखना बेहद जरूरी है, जिससे पालन-पोषण अधिक समृद्ध और संतुलित बनता है। यह विचार मृदुला भाटकर, मुंबई उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि एकल अभिभावकत्व निभाने के लिए मानसिक दृढ़ता अत्यंत आवश्यक होती है।
राष्ट्रीय सिंगल पेरेंट दिवस (21 मार्च) के अवसर पर ‘क्रिसेंट म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स’ द्वारा आयोजित सिंगल पेरेंट सम्मेलन में वे मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रही थीं। यह कार्यक्रम पुणे के बीएमसीसी रोड स्थित दादासाहेब दरोडे सभागार में आयोजित किया गया। इस अवसर पर दीपस्तंभ फाउंडेशन के संस्थापक यजुवेंद्र महाजन, पारिवारिक न्यायालय की वरिष्ठ काउंसलर डॉ. स्मिता प्रकाश जोशी, राजेंद्र ततार, क्रिसेंट म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स के संस्थापक दिनेश कोठावदे तथा निदेशक भूषण वाणी सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संघर्षरत सिंगल पेरेंट्स को विशेष रूप से सम्मानित भी किया गया।
मृदुला भाटकर ने अपने संबोधन में कहा कि सिंगल पेरेंट्स को भावनात्मक, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन इन्हीं परिस्थितियों से सीख लेकर वे स्वयं को अधिक सक्षम बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की तुलना करने के बजाय उनके व्यक्तित्व का सम्मान करते हुए उन्हें सही दिशा देना आवश्यक है। विश्वास, संवाद और समझदारी के आधार पर ही माता-पिता और बच्चों का रिश्ता मजबूत होता है।
उन्होंने यह भी कहा कि समाज के साथ कानून भी बदलते रहते हैं, इसलिए सिंगल पेरेंट्स को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहना चाहिए। वैवाहिक जीवन में असफलता का अर्थ यह नहीं है कि कोई व्यक्ति एक अच्छा अभिभावक नहीं बन सकता, बल्कि कई बार ऐसे लोग अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार माता-पिता साबित होते हैं।


