पूणे

रसान्स कंपनी ने पार किया ₹471 करोड़ का आंकड़ा; तकनीक, पारदर्शिता और कर्मचारी भागीदारी के बल पर देशभर में बढ़ा रही है नेटवर्क 

रसान्स कंपनी ने पार किया ₹471 करोड़ का आंकड़ा; तकनीक, पारदर्शिता और कर्मचारी भागीदारी के बल पर देशभर में बढ़ा रही है नेटवर्क 

 

पुणे  : देश की सबसे बड़ी स्वदेशी कॉन्ट्रैक्ट फूड सर्विसेज कंपनी रसान्स प्राइवेट लिमिटेड ने 31 मार्च 2025 को समाप्त वित्तीय वर्ष के लिए अपने अंतरिम वित्तीय परिणाम घोषित किए हैं। कंपनी ने मौजूदा वित्तीय वर्ष में 29% की सालाना वृद्धि दर्ज करते हुए 471 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल किया है और क्षेत्र में अपनी अपनी लीडरशिप बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

 

स्पार्क कैपिटल एआईएफ के सहयोग से और पूर्व सीआरसीएल के लेवरेज्ड बायआउट व पुनर्गठन से स्थापित रसान्स प्राइवेट लिमिटेड वर्तमान में देशभर के औद्योगिक परिसरों, शैक्षणिक संस्थानों और कॉर्पोरेट पार्कों में प्रतिदिन 3.25 लाख से अधिक भोजन का वितरण करती है। यह विस्तार कंपनी के मजबूत, तकनीक-संचालित और बेहतर संचालन केंद्रित मॉडल की मजबूती को दर्शाती है।

 

वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान, रसान्स ने उत्तर और पश्चिम भारत में अपनी उपस्थिति और मजबूत की तथा अखिल भारतीय स्तर पर विस्तार को गति दी। इस अवधि में कंपनी का EBITDA मार्जिन 3.6% रहा। इसी दौरान, रसान्स ने अपने राजस्व का लगभग 2% हिस्सा तकनीकी समाधानों, रोबोटिक्स-आधारित प्रोसेस ऑटोमेशन, ईआरपी गवर्नेंस सिस्टम और कर्मचारी कल्याण जैसे क्षेत्रों में निवेश किया। अल्पकालिक लाभ के बजाय संस्थागत क्षमता और दीर्घकालिक स्थिरता के लिए कंपनी की प्रतिबद्धता इन निवेशों में झलकती है।

 

“खरीद से लेकर ग्राहक तक पूरी वैल्यू चेन में दक्षता बढ़ाने के लिए तकनीक-आधारित प्रदर्शन उत्कृष्टता ही हमारी विकास रणनीति का केंद्र है। इसके साथ ही हम अपने ग्राहकों के साथ दीर्घकालिक सामंजस्य भी बनाए हुए हैं,” रसान्स के एमडी और सीईओ संजय कुमार ने कहा।

 

कुमार ने आगे जोर देते हुए कहा कि रैसेंस एक पेशेवर रूप से संचालित, तकनीक-प्रेरित और उत्कृष्ट कर्मचारी कल्याण प्रथाओं में गहराई से निवेशित संगठन बनने के लिए प्रतिबद्ध है

 

खास बात यह है कि रसान्स देश की एकमात्र फूड सर्विस कंपनी है, जिसका ऑडिट वैश्विक स्तर की ‘बिग फाइव’ ऑडिट फर्म में से एक करती है। कंपनी ने लगातार बीडीओ को अपना वैधानिक ऑडिटर बनाए रखा है, जो उसके मजबूत प्रशासन और वित्तीय पारदर्शिता पर भरोसा दर्शाता है। जीएसटी पर इनपुट टैक्स क्रेडिट न मिलने से फूड सर्विस सेक्टर में पारदर्शिता की कमी और बिखरी हुई संरचना की स्थिति में यह पहल और भी अहम हो जाती है।

 

“अनुपालन, डेटा पारदर्शिता और दक्षता पर आधारित ‘गवर्नेंस-फर्स्ट’ हमारा काम करने का तरीका है, जिसके माध्यम से हम ऐसा संस्थान बना रहे हैं जिसे राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार दिया जा सके,” कुमार ने आगे कहा।

 

कंपनी की नेतृत्व संरचना भी उतनी ही उन्नत है। रसान्स का संचालन विविध पृष्ठभूमि वाले कार्यकारी बोर्ड द्वारा किया जाता है, जिनमें से कई के पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी उभरती तकनीकों का औपचारिक प्रशिक्षण है। इससे कंपनी की डेटा-आधारित कार्यशैली और निर्णय प्रक्रिया को मजबूती मिलती है।

 

उद्योग की पारंपरिक प्रथाओं से अलग रसान्स ने प्रमोटर-केंद्रित स्वामित्व मॉडल को तोड़ते हुए एक विशेष शेयर डाइल्यूशन कार्यक्रम लागू किया है। इसके तहत साइट-स्तरीय प्रबंधकों और संचालन प्रमुखों को भी इक्विटी में हिस्सेदारी दी गई है। पारंपरिक ईएसओपी मॉडल से अलग यह समावेशी दृष्टिकोण कंपनी के 4,000 से अधिक कर्मचारियों में ओनरशिप की भावना को मजबूत करता है। विशेष रूप से, सभी कर्मचारी पेरोल पर हैं और उन्हें सभी वैधानिक लाभ मिलते हैं।

 

ऑपरेशंस और प्रशासन से आगे बढ़कर रसान्स पर्यावरणीय जिम्मेदारी की दिशा में भी ठोस कदम उठा रही है। रसोई के कचरे का पुन: उपयोग करके तैयार किए गए कम्पोस्टिंग और अर्बन फार्मिंग कार्यक्रमों के जरिए कंपनी ने सर्कुलर फूड सिस्टम की ओर एक सोच-समझकर बदलाव किया है। कंपनी का मानना है कि बड़े पैमाने पर सेवा देने वाली फूड डिलीवरी प्रणालियां टिकाऊ होनी चाहिए, और यह सिद्धांत उसके इन प्रयासों में झलकता है।

 

आगामी वित्तीय वर्ष 2025-26 को देखते हुए, रसान्स ने 564 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का लक्ष्य रखा है और मौजूदा ग्राहकों के साथ-साथ नए सेवा क्षेत्रों से भी वृद्धि की उम्मीद जताई है। कंपनी का फोकस ऑर्गेनिक ग्रोथ पर है और फिलहाल बाहरी फंडिंग जुटाने या अधिग्रहण की कोई तात्कालिक योजना नहीं है।

 

तकनीक, प्रशासन और स्थिरता पर आधारित एकीकृत मॉडल के बल पर रसान्स भारत के विकसित होते फूड सर्विस सेक्टर में नए मानक स्थापित कर रही है और आगामी विकास चरण के लिए पूरी तरह तैयार है।

 

 

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