इटावासंपादकीय

“अभिव्यक्ति की आज़ादी बनाम देश विरोधी सोच”

संपादकीय —अभिव्यक्ति की आज़ादी बनाम देश विरोधी सोच”

संपादकीय टीम इटावा, विशाल समाचार

लोकतंत्र में मतभेद और बहस स्वस्थ राजनीति की पहचान है, लेकिन जब ये बहसें देश-विरोधी मानसिकता और हिंसक संदेशों में बदल जाती हैं, तो यह केवल राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा पर सीधा प्रहार है।

 

हाल ही में जिला कांग्रेस कमेटी इटावा के महासचिव अनुप सिंह परमार द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई एक बेहद आपत्तिजनक पोस्ट ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राजनीति के नाम पर अब राष्ट्रहित से ऊपर निजी और दलगत नफरत को रखा जा रहा है?

पोस्ट में “भारत जलाओ” जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया, जो किसी भी दृष्टि से राजनीतिक आलोचना की सीमा में नहीं आता, बल्कि सीधे-सीधे देश की एकता, अखंडता और संवैधानिक मूल्यों को ठेस पहुंचाता है।

 

विपक्ष का काम सरकार की नीतियों की आलोचना करना, जनहित के मुद्दे उठाना और लोकतांत्रिक संवाद को जीवित रखना है। लेकिन अगर आलोचना हिंसा, विनाश और राष्ट्रविरोध के संदेश में बदल जाए, तो यह लोकतंत्र के लिए जहर बन जाती है।

 

अनुप सिंह परमार जैसे पदाधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने विचार सभ्यता और संवैधानिक दायरे में व्यक्त करें। एक राजनीतिक पदाधिकारी के शब्द समाज पर गहरा असर डालते हैं, इसलिए ऐसे बयान या पोस्ट न केवल सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ते हैं, बल्कि कानून व्यवस्था को भी चुनौती देते हैं।

 

पत्रकारिता का धर्म है सच को सामने लाना, चाहे वह किसी भी दल या व्यक्ति के खिलाफ क्यों न हो। सच यह है कि “भारत जलाओ” जैसी सोच न केवल असंवैधानिक है, बल्कि उन शहीदों के बलिदान का अपमान है जिन्होंने अपनी जान देकर इस देश को आज़ाद करवाया।

अब समय है कि कांग्रेस पार्टी इस मामले पर स्पष्ट रुख अपनाए और यह संदेश दे कि लोकतांत्रिक विरोध का अधिकार देश-विरोध की सीमा तक नहीं जा सकता।

याद रखिए — देश रहेगा तभी राजनीति भी रहेगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button