पूणे

उस’ जगह पर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र बनाया जाए!

उस’ जगह पर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र बनाया जाए!

 

केंद्र से निधि देने की मांग; डॉ. हुलगेश चलवादी का बयान,ठिठिया आंदोलन में बसपा होगी सहभागी

 

रिपोर्ट पुणे डीएस तोमर :

 

मालधक्का चौक स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सांस्कृतिक भवन के विस्तार के लिए ससून अस्पताल के सामने और सांस्कृतिक भवन से सटी सार्वजनिक निर्माण विभाग की भूमि राज्य सरकार को देनी चाहिए। इस जगह पर भव्य डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र बनाया जाए और इसके लिए राज्य व केंद्र सरकार निधि प्रदान करे, ऐसी मांग बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश महासचिव एवं पश्चिम महाराष्ट्र जोन के मुख्य प्रभारी डॉ. हुलगेश चलवादी ने गुरुवार (14 तारीख) को की। उन्होंने कहा कि इस कार्य में राज्य ही नहीं, बल्कि देशभर की आंबेडकरी जनता भी योगदान देगी। प्रगतिशील महाराष्ट्र में महापुरुषों की वैचारिक धरोहर को आगे बढ़ाने के लिए उनके विचारों को स्थायी रूप से दर्ज करने वाले भव्य केंद्र बनाना आवश्यक है, यह बसपा की स्पष्ट भूमिका है।

 

मंगलवार पेठ स्थित इस भवन के विस्तार के लिए भूमि देने की आंबेडकरी आंदोलन से मांग रही है, लेकिन यह भूमि एक निजी बिल्डर को देने का अवैध निर्णय लिया गया। इस निर्णय से समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सांस्कृतिक भवन विस्तार कार्य समिति के विरोध में 15 अगस्त को दोपहर 1 बजे आयोजित ‘ठिया’ आंदोलन में बसपा शामिल होगी, यह जानकारी डॉ. चलवादी ने दी। दिवंगत मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने इस संबंध में दो एकड़ भूमि विस्तार के लिए देने का आश्वासन दिया था, लेकिन दो दशक बीतने के बाद भी अब तक के मुख्यमंत्रियों को यह वादा याद नहीं रहा है।

 

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस मुद्दे को सुलझाएंगे, ऐसी बसपा की अपेक्षा है। भवन के विस्तार के लिए यह भूमि सरकार देती है तो उस पर भव्य स्मारक के साथ अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित सबसे बड़ा पुस्तकालय और डॉ. बाबासाहेब के जीवन-पथ को दर्शाने वाला संग्रहालय बनाया जा सकता है, ऐसा डॉ. चलवादी ने कहा। 20 जुलाई 2000 को यह भूमि विस्तार के लिए देने का प्रस्ताव पुणे महापालिका की स्थायी समिति और मुख्य सभा ने मंजूर किया था। लेकिन, 4 सितंबर 2024 से इस प्रस्ताव को दरकिनार कर यह भूमि 60 वर्षों के किराए के समझौते पर अवैध रूप से निजी व्यापारी को दी गई।

 

अब आंबेडकरी समाज के आंदोलन ने शासकों की आंखें खोल दी हैं। सांस्कृतिक भवन के विस्तार के प्रत्येक आंदोलन को बसपा का समर्थन है। प्रत्यक्ष भवन विस्तार का कार्य शुरू होने तक यह आंदोलन जारी रहेगा, ऐसा रुख आंदोलनकारियों ने अपनाया है, यह जानकारी डॉ. चलवादी ने दी।

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