
हक की महार वतन जमीनें वापस करो : डॉ. हुलगेश चलवादी
‘वतन जमीन हक कानून’ बनाने की उठी जोरदार मांग
पुणे : गाँव की सेवा के बदले दी गई ‘महार वतन’ जमीनें किसी का दान या उपकार नहीं थीं, बल्कि यह हक के तौर पर दी गई जमीनें थीं। इसलिए इन जमीनों को वास्तविक वारिसों को लौटाना ही सामाजिक न्याय की असली परिभाषा होगी। इस उद्देश्य से बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश महासचिव एवं पश्चिम महाराष्ट्र ज़ोन के मुख्य प्रभारी डॉ. हुलगेश चलवादी ने बुधवार (27 अगस्त) को पुणे में आयोजित पत्रकार परिषद में राज्य सरकार से ‘वतन जमीन हक कानून’ बनाने की जोरदार मांग की।
डॉ. चलवादी ने कहा कि अब तक सरकारों ने इस प्रश्न को समितियाँ गठित कर और रिपोर्ट तैयार कर टालने का प्रयास किया है। लेकिन अब वक्त आ गया है कि स्पष्ट और ठोस कानून बनाकर जमीनों के परताव की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए। उन्होंने कहा कि केवल कानूनी प्रावधान और सरकार के मजबूत फैसले से ही महार वतन जमीन का स्थायी समाधान निकल सकता है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में अनेक गाँवों में महार वतन जमीनों का मालिकाना हक कागज़ों पर दर्ज नहीं है। कई जमीनें आज भी सरकार के कब्जे में हैं, जबकि कुछ पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है। कई मामले न्यायालयों में लंबित हैं और समाज को न्याय पाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है। ऐसी स्थिति में इन प्रकरणों को निपटाने के लिए विशेष न्यायाधिकरण स्थापित कर त्वरित फैसले दिए जाएं, यह समय की आवश्यकता है।
डॉ. चलवादी ने कहा कि वतन जमीनों का सर्वेक्षण कर और नक्शे तैयार करके यह स्पष्ट किया जाए कि कौन-सी जमीन किस वतनदार के नाम पर थी। जिन परिवारों की जमीनें अन्य लोगों के पास चली गई हैं, उन्हें सरकार से वैकल्पिक जमीन अथवा नुकसानभरपाई दी जानी चाहिए।
इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पेशवाई और ब्रिटिश शासनकाल के दौरान गाँव में कानून-व्यवस्था बनाए रखना, सुरक्षा करना, सरकारी संदेश पहुँचाना, मृतदेह उठाना और आदेशों का पालन करवाना जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ महार समाज को सौंपी जाती थीं। इन सेवाओं के बदले उन्हें वतन के रूप में जमीनें प्रदान की गई थीं। लेकिन स्वतंत्रता के बाद वतन प्रथा समाप्त कर दी गई और ये जमीनें या तो सरकारी खातों में दर्ज हो गईं या दूसरों ने कब्जा कर लीं। परिणामस्वरूप महार समाज को अपने पूर्वजों के हक की जमीन अब तक वापस नहीं मिली।
उन्होंने कहा कि दलित समाज पर अत्याचार रोकने के लिए जैसे ‘अत्याचार निवारण अधिनियम’ बनाया गया, उसी प्रकार अलग से ‘वतन जमीन हक कानून’ बनाना आवश्यक है। इस कानून से न केवल ऐतिहासिक अन्याय का निवारण होगा बल्कि राज्य में वास्तविक सामाजिक न्याय की स्थापना भी होगी।
डॉ. चलवादी ने स्पष्ट कहा कि अब तक की सरकारों ने इस मुद्दे को केवल लटकाया है। राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण यह प्रश्न हल नहीं हो सका है। इसलिए बहुजन समाज को सत्ता में आने का अवसर मिलना जरूरी है, तभी इस विषय का ठोस समाधान संभव होगा।


