पूणे

अनुसूचित जाति-जनजाति प्रवर्ग के नागरिकों को न्याय दिलाने के लिए आयोग कटिबद्ध : उपाध्यक्ष एड. धर्मपाल मेश्राम

अनुसूचित जाति-जनजाति प्रवर्ग के नागरिकों को न्याय दिलाने के लिए आयोग कटिबद्ध : उपाध्यक्ष एड. धर्मपाल मेश्राम

 

पुणे, (सोहन सिंह तोमर): महाराष्ट्र राज्य अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग राज्य के अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति प्रवर्ग के नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है। यह बात आयोग के उपाध्यक्ष एड. धर्मपाल मेश्राम ने शासकीय विश्रामगृह में आयोजित पत्रकार परिषद में कही।

 

एड. मेश्राम ने कहा कि महाराष्ट्र राज्य अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग की स्थापना 1 मार्च 2005 को की गई थी। वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आयोग को पृथक कर वैधानिक दर्जा प्रदान किया। इससे सामाजिक न्याय के प्रति उनकी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।

 

उन्होंने आगे कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्था (बार्टी), आदिवासी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्था (टार्टी), छत्रपति शाहू महाराज अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं मानव विकास संस्था (सारथी), तथा महात्मा ज्योतिबा फुले अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्था (महाज्योती) जैसी संस्थाओं के माध्यम से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा मराठा समाज के विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन संस्थाओं के कामकाज पर आयोग की पैनी नजर है और यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है तो संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

 

एड. मेश्राम ने बताया कि हाल ही में संपन्न जन सुनवाई में बैंकिंग सॉल्यूशन (बीएस) एजुकेशन संस्था के खिलाफ प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। इस संबंध में आदिवासी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान को गहन जांच कर वस्तुनिष्ठ रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर आयोग को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर संबंधित संस्था पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

 

पुणे जिले में ग्राम पंचायतों का नगर परिषद में रूपांतरण होने पर नगर विकास प्रशासन की ओर से सफाई कर्मचारी पद को आकृतिबंध में शामिल नहीं किया गया है, जिसके कारण इन कर्मचारियों और उनके परिवारों को सरकारी लाभ से वंचित होना पड़ रहा है। इस मुद्दे पर आयोग ने गंभीर दखल लेते हुए नगर विकास प्रशासन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है तथा इस पद को आकृतिबंध में शामिल करने की सिफारिश की है।

 

एड. मेश्राम ने स्पष्ट किया कि आयोग की प्राथमिकता समाज के वंचित तबकों को न्याय दिलाना है और इस दिशा में हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा।

 

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