
ऊर्जा मंत्री तक पहुँची शिकायत, फिर भी उपभोक्ता बेहाल – सिस्टम से लगाम है तो न्याय कहाँ मिलेगा?
विशाल समाचार मुख्य संवाददाता
हर महीने 24 लाख की लूट – इटावा बिजली विभाग की बिलिंग में खुला खेल
मंत्री कार्यालय तक पहुँची शिकायत, फिर भी उपभोक्ता को राहत नहीं
नारेबाज़ी बनाम हकीकत – उपभोक्ता पूछ रहे जवाब, अफसर और पीए फोन काटते रहे
स्मार्ट मीटर से और बढ़ेगी जनता की परेशानी, डर गहराता जा रहा है
इटावा/लखनऊ: इटावा की एक महिला उपभोक्ता का मामूली सा बिजली बिल विवाद अब पूरे विभाग की असलियत खोल रहा है। बिल में गड़बड़ी की शिकायत दर्ज कराने के बाद उपभोक्ता ने लाइन से लेकर मंत्री कार्यालय तक हर दरवाज़ा खटखटाया। लेकिन न अफसरों ने फोन उठाया, न मंत्री जी के पीए ने जवाब दिया। सवाल उठता है कि जब जनता को न्याय दिलाने वाला पूरा सिस्टम ही चुप है तो न्याय आखिर मिलेगा कहाँ से?
रिपोर्ट:इटावा निवासी प्रीति देवी ने ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा को पत्र लिखकर बिजली बिलिंग में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि मकान वर्षों से बंद रहने के बावजूद हर माह अलग-अलग बिल थमा दिए जाते हैं। पिछले साल भी शिकायत की गई थी, तब भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
उपभोक्ता ने गणना कर बताया कि यदि हर उपभोक्ता से औसतन ₹36 अधिक वसूला जा रहा है तो केवल इटावा शहर के 66,651 कनेक्शन से हर माह करीब ₹24 लाख की रकम लोगों की जेब से निकल रही है।
15 अगस्त 2025 को उपभोक्ता ने बिजली विभाग के टोल-फ्री नंबर से लेकर स्थानीय एसडीओ, अधिशाषी अभियंता तक कई बार सम्पर्क करने की कोशिश की, मगर सभी फोन खामोश रहे। यहां तक कि ऊर्जा मंत्री के पीए तक बार-बार फोन और मैसेज करने के बावजूद जवाब नहीं मिला।

आख़िरी समय तक उपभोक्ता मंत्री कार्यालय और विभाग के चक्कर काटता रहा। आख़िरकार, शिकायत सुनने की बजाय उपभोक्ता से कागज़ भेजने की औपचारिकता मांगी गई और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
ऊर्जा मंत्री जब जनता शिकायत लेकर पहुँचती है, तो मंत्री महोदय समस्या निपटाने की बजाय बार-बार जनता के बीच “जय श्रीराम, जय जय श्रीराम” के नारों के साथ नज़र आते हैं। मगर सवाल यह है कि क्या सिर्फ़ नारे लगाने से उपभोक्ताओं की समस्या हल होगी? जब पूरा सिस्टम ही लगाम में है, तो जवाब आखिर देगा कौन?


