
शाश्वत भविष्य के लिए एआई का उपयोग आवश्यक : अभिजीत अटले
एमआईटी डब्ल्यूपीयू में ‘एचएसडब्ल्यू टेक-2025’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन
पुणे, :“हवामान अनुकरण, वायु गुणवत्ता निगरानी, अचूक कृषि तथा ऊर्जा अनुकूलन जैसे क्षेत्रों में एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का प्रयोग शाश्वत विकास को गति प्रदान कर रहा है। इस अवसर का लाभ लेते हुए एआई से जुड़े नैतिक पहलुओं को ध्यान में रखना भी आवश्यक है। शाश्वत भविष्य के लिए एआई का उपयोग नवोन्मेषी परंतु जिम्मेदार तरीके से होना चाहिए और डेटा संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है।” — ऐसे विचार आईबीएम के लीड क्लाइंट पार्टनर अभिजीत अटले ने व्यक्त किए।
वे एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी, पुणे के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘आईईईई इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन सस्टेनेबिलिटी टेक्नोलॉजी फॉर ह्यूमैनिटी एंड स्मार्ट वर्ल्ड’ (HSW Tech-2025) के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। यह सम्मेलन एमआईटी डब्ल्यूपीयू के कार्याध्यक्ष डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया है।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. सुब्रा कांती दास, आईईआई पुणे विभाग के सचिव डॉ. अभिजीत खुरापे, तथा ब्रॉडकॉम के वरिष्ठ अभियांत्रिकी प्रबंधक सुनील खराटे उपस्थित थे।
कार्यक्रम में एमआईटी डब्ल्यूपीयू के कुलगुरु डॉ. आर.एम. चिटणीस, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. भरत काळे, अधिष्ठाता डॉ. सिद्धार्थ चक्रवर्ती, तकनीकी कार्यक्रम समिति के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. भरत चौधरी, कार्यक्रम निदेशक डॉ. पारुल जाधव तथा प्रा. डॉ. सुनिल सोमाणी भी उपस्थित थे।
सम्मेलन में विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए :
सुनील खराटे ने तकनीक और सोशल डिज़ाइन में नवीनतम प्रगति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सेमीकंडक्टर स्केलिंग प्रदर्शन, कार्यक्षमता और एकीकरण को कैसे गति देती है। उन्होंने आईओटी, 5जी तथा आरई सर्किट डिज़ाइन की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए एआई और ऑटोमेशन के प्रभाव पर भी प्रकाश डाला।
निखिल दातार (उपाध्यक्ष एवं वैश्विक वितरण प्रमुख, एलटीआई माइंडट्री) ने ग्रीन एआई तथा तकनीक और अध्यात्म के समन्वय पर विचार रखते हुए कहा कि नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए ऊर्जा खपत और कार्बन फुटप्रिंट कम करना समय की मांग है।
डॉ. सुब्रा कांती दास ने एआई के व्यापक उपयोग से भविष्य निर्माण की संभावनाओं पर बल दिया।

डॉ. आर.एम. चिटणीस, डॉ. भरत काळे, डॉ. भरत चौधरी तथा डॉ. सिद्धार्थ चक्रवर्ती ने अपने विचार रखते हुए कहा कि अक्षय ऊर्जा प्रणाली, स्मार्ट ग्रिड, एआई संचालित जलवायु मॉडलिंग, आईओटी आधारित अचूक कृषि और हरित सामग्री के जरिए शाश्वत समाधान को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है।
डॉ. पारुल जाधव ने प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस सम्मेलन के माध्यम से न केवल नई अवधारणाओं पर चर्चा होगी, बल्कि उन्हें सशक्त बनाने का कार्य भी किया जाएगा। इससे मानवता के हित में प्रौद्योगिकी के विकास की दिशा में आईईईई की दृष्टि को बल मिलेगा।
कार्यक्रम का सूत्रसंचालन एवं आभार प्रदर्शन डॉ. सुनिल सोमाणी ने किया।



