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सीतामढ़ी विधानसभा सीट पर पिंटू परिवार का अनोखा रिकॉर्ड

सीतामढ़ी विधानसभा सीट पर पिंटू परिवार का अनोखा रिकॉर्ड

तीन पीढ़ियों ने संभाली जनता की बागडोर, राजनीतिक विरासत बनी मिसाल

सीतामढ़ी| कुणाल किशोर श्रीवास्तव 

सीतामढ़ी:  बिहार की राजनीति में सीतामढ़ी विधानसभा सीट एक अनोखी पहचान रखती है। यहाँ एक ही परिवार की तीन पीढ़ियाँ विधायक बनकर जनता की सेवा कर चुकी हैं। यह गौरव पूर्व सांसद सुनील कुमार पिंटू के परिवार को प्राप्त है।

तीन पीढ़ियों की राजनीतिक यात्रा

दादा किशोरी लाल साह — वर्ष 1962 में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ते हुए विधायक बने। उन्होंने कुल 41.27% वोट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की और विधानसभा में सीतामढ़ी का प्रतिनिधित्व किया।

बेटे हरिशंकर प्रसाद — वर्ष 1995 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और जनता दल प्रत्याशी शाहिद अली खान को हराकर विधानसभा पहुँचे। यह दौर भाजपा के विस्तार का समय था और हरिशंकर प्रसाद की जीत पार्टी के लिए अहम मानी गई।

 

पोते सुनील कुमार पिंटू — वर्ष 2005 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में पहली बार विधायक बने और 2010 में भी लगातार दूसरी बार जनता का विश्वास जीतकर विधायक चुने गए। इसके बाद 2019 में वे जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के टिकट पर सीतामढ़ी से सांसद निर्वाचित हुए।

 

 

राजनीतिक विरासत का प्रतीक:इस परिवार की लगातार तीन पीढ़ियों का विधायक बनना सीतामढ़ी की जनता के विश्वास और परिवार की गहरी राजनीतिक पकड़ को दर्शाता है। आमतौर पर किसी एक परिवार की राजनीतिक पकड़ समय के साथ कमजोर हो जाती है, लेकिन पिंटू परिवार ने लगातार अपनी मौजूदगी और जनाधार बनाए रखा।

जनता का जुड़ाव: स्थानीय लोगों का कहना है कि पिंटू परिवार ने हमेशा विकास और जनता के मुद्दों को प्राथमिकता दी। यही कारण है कि तीन पीढ़ियों तक मतदाता इस परिवार को चुनते रहे और उनकी राजनीतिक विरासत आज भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

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