
रामेश्वर रुई में ‘विश्वधर्मी मानवता तीर्थ भवन’ का भव्य महाद्वार एवं पवनपुत्र श्री हनुमान मूर्ति की स्थापना
विश्वधर्मी प्रा. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड की संकल्पना से साकार
पुणे | विशाल समाचार
रामेश्वर रुई ग्राम का हाल ही में ‘विश्वधर्मी मानवता तीर्थ’ के रूप में नामकरण किया गया है। इसी के अंतर्गत ‘विश्वधर्मी मानवता तीर्थ भवन’ का भव्य निर्माण कार्य पूर्ण हुआ है। विश्व शांति केंद्र, आळंदी एवं माईर्स एमआईटी, पुणे भारत के सौजन्य से इस भवन का लोकार्पण समारोह 5, 6 और 7 अक्टूबर 2025 को आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर देशभर से विभिन्न धर्मों के प्रतिष्ठित मान्यवर बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे।
भवन की पूर्वतैयारी अंतर्गत, इस ऐतिहासिक धरोहर का संपूर्ण नक्काशीदार लकड़ी का भव्य महाद्वार निर्मित किया गया है। साथ ही परिसर में पवनपुत्र श्री हनुमान जी की 11 फुट ऊँची भव्य और आकर्षक प्रतिमा की स्थापना हाल ही में संपन्न हुई है। इस कार्यक्रम में विश्वधर्मी प्रा. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड, सौ. उषा विश्वनाथ कराड, रामेश्वर रुई के पूर्व सरपंच तुळशीराम दा. कराड, काशीनाथ दा. कराड, राजेश कराड तथा पंचक्रोशी क्षेत्र के नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
इस भवन में विश्व के विभिन्न धर्मों के संस्थापकों, संतों, सज्जनों, वैज्ञानिकों, विचारकों और दार्शनिकों के सचित्र परिचय के माध्यम से विश्व को शांति और मानवता का संदेश देने का कार्य किया जाएगा।
इस अवसर पर प्रा. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा—
“महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र का रामेश्वर रुई ग्राम यज्ञभूमि के रूप में प्रसिद्ध है। इसी ग्राम में हिंदू और मुस्लिम समाजबंधुओं ने लगभग 275 वर्ष पूर्व ध्वस्त किए गए श्रीराम मंदिर का पुनर्निर्माण किया तथा लगभग 63 वर्ष पूर्व नष्ट की गई जामा मस्जिद और ख्वाजा जैनुद्दीन चिश्ती दरगाह की भी पुनर्बांधणी की। यह भारत के इतिहास में सांप्रदायिक सद्भाव का अद्वितीय उदाहरण है। इसके साथ ही तथागत भगवान गौतम बुद्ध विहार एवं भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मृति भवन का भी निर्माण यहां किया गया। इन ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहल के कारण यह ग्राम वास्तविक रूप से ‘मानवतातीर्थ’ के रूप में वैश्विक स्तर पर स्थापित हुआ है।”

महात्मा गांधी की 156वीं तथा भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री, सादगी और उच्च विचारों के प्रतीक भारतरत्न श्री लाल बहादुर शास्त्री की 101वीं जयंती के अवसर पर ‘विश्वधर्मी मानवता तीर्थ भवन’ का लोकार्पण विशेष रूप से आयोजित किया गया है।
इस अवसर पर डॉ. कराड ने पंचक्रोशी क्षेत्र के नागरिकों से आवाहन किया कि वे इस भवन का उपयोग सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए करें। यह भवन राष्ट्रीय एकता और मानवता का सशक्त प्रतीक बनेगा।


