
हाफ़किन संस्थान की कठिनाइयाँ दूर करने के लिए पहल होगी – मंत्री नरहरी झिरवाळ
पिंपरी-चिंचवड़ में हाफ़किन संस्थान के कामकाज का लिया जायज़ा
पुणे (मोहन सिंह) : हाफ़किन संस्थान एक विश्व-स्तरीय प्रतिष्ठित संस्था है, जहाँ विभिन्न टीकों का उच्च गुणवत्ता वाला उत्पादन किया जाता है। इन टीकों की वैश्विक स्तर पर बड़ी मांग है। संस्थान को मज़बूत बनाने के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रस्ताव सरकार को प्रस्तुत किया गया है। संस्थान की कठिनाइयों को दूर करने के लिए राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार से चर्चा कर सकारात्मक समाधान निकाला जाएगा, ऐसा आश्वासन खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवाळ ने दिया।
पिंपरी-चिंचवड़ स्थित हाफ़किन बायोफार्मास्युटिकल कॉरपोरेशन प्रोजेक्ट का दौरा कर आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री झिरवाळ बोल रहे थे। इस अवसर पर हाफ़किन के प्रबंध निदेशक सुनील महिंद्रकर, महाप्रबंधक डॉ. प्रदीप धिवर, प्रबंधक नवनाथ गर्जे, पिंपरी-चिंचवड़ संस्थान के प्रबंधक डॉ. बाबासाहेब कुहे, खाद्य एवं औषधि प्रशासन के सहआयुक्त गिरीश हुकरे, सहायक आयुक्त कोंडीबा गाडेवार, पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका के पूर्व महापौर योगेश बहल सहित अन्य मान्यवर उपस्थित थे।
मंत्री झिरवाळ ने एंटीवेनम उत्पादन, क्वालिटी एश्योरेंस, उत्पादन इकाई, पशु-चिकित्सा विभाग, कर्मचारी आवास, तबेला और सर्पालय का दौरा किया तथा अनुसंधान, औषधि उत्पादन क्षमता, दवाओं की मांग, आपूर्ति, गुणवत्ता, भंडारण और परीक्षण प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त की।
इस अवसर पर श्री महिंद्रकर ने मुंबई केंद्र की जानकारी दी, जबकि डॉ. कुहे ने पिंपरी-चिंचवड़ संस्थान की ज़मीन, मानव संसाधन, कर्मचारी आवास, उपलब्ध साधन-सुविधाएँ और आर्थिक स्थिति की जानकारी दी। इसके अलावा संस्थान द्वारा उत्पादित सर्पदंश, बिच्छूदंश, घटसर्प, कुत्ते के काटने, गैस गैंगरीन एंटीवेनम, टिटनस एंटीटॉक्सिन, पोलियो वैक्सीन उत्पादन, भंडारण क्षमता और उससे होने वाले राजस्व पर पीपीटी के माध्यम से विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई।


