
इटावा विकास बैठक और शहर में प्रतिमा विवाद: शहीद बनाम राजनीतिक हस्तियाँ
इटावा (विशाल समाचार)
इटावा में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक विकास भवन स्थित प्रेरणा सभागार में सांसद जितेन्द्र कुमार दोहरे की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान सांसद ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए और अफसरों को चेतावनी दी कि कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
बैठक में जलजीवन मिशन से लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई और सड़क निर्माण तक हर योजना की कड़ी समीक्षा की गई। सांसद ने टूटी-फूटी सड़कें, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में टीकाकरण, हैंडपंपों और चेक डैम की स्थिति, शिक्षा और आयुष्मान कार्ड वितरण, बिजली आपूर्ति और मलिन बस्तियों की सफाई पर सख्त निर्देश दिए। उनका साफ संदेश था – जनप्रतिनिधियों और अफसरों को जनता के सामने जवाबदेह होना पड़ेगा।
शहीद स्मारक बनाम राजनीतिक प्रतिमा
बैठक के दौरान एक सवाल ने पब्लिक का ध्यान खींचा — शहर में कौन-कौन सी प्रतिमाएँ स्थापित हों? सांसद ने एसएसपी चौराहा पर पूर्व मुख्यमंत्री की प्रतिमा लगाने का सुझाव दिया।
यह सुझाव आते ही सवाल उठ गया कि क्या बड़े चौराहों पर केवल राजनीतिक हस्तियों की प्रतिमाएँ उचित हैं?
हमारा सुझाव स्पष्ट है: शहरों में शहीदों और महान विभूतियों की स्मृतियाँ और प्रतिमाएँ प्राथमिकता में होनी चाहिए। राजनीतिक हस्तियों की प्रतिमा केवल उपयुक्त स्थानों पर, जहाँ शहीद स्मारक या राष्ट्रीय नायकों की जगह न घेरे, लगाई जाए।
अगर हर चौराहे पर राजनीतिक हस्तियों की प्रतिमा लगेगी, तो शहीदों और महान विभूतियों को जगह नहीं मिलेगी। सूत्रों का कहना है किसी भी नामी चौराहे पर राजनीति हस्तियां की प्रतिमा लगाना उचित नहीं? यही नहीं, यह जनता में संदेश भी बदल सकता है कि बलिदान और त्याग की जगह राजनीति ही सर्वोपरि है। शहर की पहचान और इतिहास को ध्यान में रखते हुए, प्रतिमा चयन संतुलित और दूरदर्शी नीति पर आधारित होना चाहिए।
हमारी राय:शहीदों और महान विभूतियों की प्रतिमाएँ प्रेरणा देती हैं। राजनीतिक हस्तियों का सम्मान भी जरूरी है, पर वह सही जगह और समय पर होना चाहिए। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सार्वजनिक स्थलों पर संतुलन और संदेश दोनों सही रहें।
समाजवादी पार्टी:कार्यालय इटावा के एक कार्यकर्ता ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि पूर्व मुख्यमंत्री की प्रतिमा लगाये जाने की बात जानबूझकर उठाईं गई है। हालांकि यह वात सही नहीं है? क्यों हमारे शाहिद बलिदानी वीर सपूतों जबानों को कहा पर जगह रहेगी? आगे कहा राज बहुत कुछ छिपा है ।?



