
१२वाँ भारतरत्न पं. भीमसेन जोशी संगीत महोत्सव आज से प्रारंभ
गुरुकुल कलाश्री संगीत मंडल एवं द औंध सोशल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारतरत्न पं. भीमसेन जोशी संगीत महोत्सव का शुभारंभ आज पुणे के औंध स्थित भारतरत्न पं. भीमसेन जोशी रंगमंदिर में हुआ। यह महोत्सव रविवार, 14 सितम्बर तक प्रतिदिन सायं 5 बजे से रात 10 बजे तक चलेगा और श्रोताओं के लिए निःशुल्क रहेगा।
महोत्सव का उद्घाटन अमेरिका के व्हाइट हाउस में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले राजदूत सुनील उपाध्याय एवं भारतरत्न पं. भीमसेन जोशी के सुपुत्र, गायक व आर्य संगीत प्रसारक मंडल के कार्याध्यक्ष श्रीनिवास जोशी के करकमलों से हुआ। इस अवसर पर गुरुकुल कलाश्री संगीत मंडल के संस्थापक एवं किराना घराने के गायक पं. सुधाकर चव्हाण, द औंध सोशल फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष वास्तुविशारद अभिजीत सुभाष गायकवाड़ तथा मंडल के विश्वस्त समीर महाजन सहित अन्य मान्यवर उपस्थित रहे।
महोत्सव का शुभारंभ भारतरत्न पं. भीमसेन जोशी के नाती एवं किराना घराने के युवा गायक विराज जोशी के गायन से हुआ। विराज ने राग कौशी कानडा में ‘राजन के महाराजा…’ और ‘काहे करत मोसे बरजोरी…’ जैसी रचनाओं की प्रस्तुति दी तथा ‘गजानन वरद विनायक हे…’ अभंग से समापन किया। उन्हें पांडुरंग पवार (तबला), गंगाधर शिंदे (संवादिनी), रवी पांचाल व प्रल्हाद शिंदे (तानपुरा) ने संगत दी।
इसके पश्चात् सुप्रसिद्ध बांसुरीवादक पं. प्रवीण गोडखिंडी ने राग मियां की मल्हार में बांसुरी वादन प्रस्तुत किया। उनकी तबला संगत पं. रामदास पळसुले ने की।
पहले दिन का समापन रोंकिनी गुप्ता के मधुर गायन से हुआ। उन्होंने राग भीमपालासी और राग रागेश्री प्रस्तुत किए। राग भीमपालासी में ‘नैना मोरी पार…’ और ‘देखो बिजुरिया…’ की बंदिशों ने श्रोताओं की वाहवाही पाई। राग रागेश्री में ‘छैल छबीला…’ और ‘जा जा रे पूरवैया…’ जैसी बंदिशें प्रस्तुत कीं। ‘माझे माहेर पंढरी…’ इस अमर अभंग से उन्होंने अपनी प्रस्तुति का समापन किया।
कार्यक्रम का संचालन आकाश थिटे ने किया।



