पूणे

पुणे करार धिक्कार परिषद’ का आयोजन

पुणे करार धिक्कार परिषद’ का आयोजन

पुणे :-बहुजन समाज पार्टी की ओर से बहुजनों, विशेषकर अनुसूचित जाति एवं वंचित घटकों के स्वतंत्र राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर गदा लाने वाले पुणे करार के विरोध में भव्य ‘पुणे करार धिक्कार परिषद’ आयोजित की जा रही है। यह परिषद बुधवार, दिनांक 24 सितम्बर 2025 को प्रातः 11 बजे, येरवड़ा स्थित लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे सभागृह में होगी। परिषद बहुजनों की राजनीतिक-सामाजिक आंदोलन को नई दिशा देने वाली साबित होगी, ऐसा विश्वास प्रदेश महासचिव एवं पश्चिम महाराष्ट्र ज़ोन के मुख्य प्रभारी डॉ. हुलगेश चलवादी ने व्यक्त किया।

 

जाहीर सभा को राज्यसभा के पूर्व सांसद एवं महाराष्ट्र के केंद्रीय प्रभारी मा. राजारामजी तथा प्रदेशाध्यक्ष एड. सुनील डोंगरे मार्गदर्शन देंगे। साथ ही प्रदेश प्रभारी रामचंद्र जाधव, पुणे ज़ोन प्रभारी एड. संजीव सदाफुले, अप्पासाहेब लोकरे, तथा पश्चिम महाराष्ट्र के सभी छह ज़िलाध्यक्ष – अशोक गायकवाड (पुणे), बबलू गायकवाड (सोलापुर), लहरीदास कांबळे (सांगली), रविन्द्र कांबळे (कोल्हापुर), आनंद थोरोडे (सातारा), सुरेश कांबळे (अहमदनगर) – प्रमुख रूप से उपस्थित रहेंगे। परिषद के दौरान पश्चिम महाराष्ट्र ज़ोन की जिला, विधानसभा एवं सेक्टर समिति की आढावा बैठक भी आयोजित की जाएगी, ऐसी जानकारी डॉ. चलवादी ने दी।

 

यह सर्वविदित है कि विश्वरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने 1930, 1931 और 1932 में लंदन में हुई गोलमेज परिषदों में अंग्रेज़ों से संघर्ष एवं बौद्धिक युक्तिवाद कर अस्पृश्यों के लिए स्वतंत्र मतदाता संघ मंजूर करवाए थे। इन स्वतंत्र मतदाता संघों के कारण ही दलित समाज के वास्तविक प्रतिनिधि विधानमंडलों तक पहुँच पाते और समाजहित का कार्य कर पाते।

 

किन्तु कांग्रेस और गांधीजी को यह अधिकार मान्य नहीं था। गांधीजी ने येरवड़ा कारागृह में आमरण अनशन आरंभ कर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर पर दबाव बनाया। कांग्रेस की मनुवादी मानसिकता रखने वाले लोगों ने दलितों पर अत्याचार आरंभ किए। ऐसी परिस्थिति में डॉ. बाबासाहेब को भारी मन से दलितों के स्वतंत्र मतदाता संघ के अधिकारों को समाप्त करने वाला पुणे करार करना पड़ा। इस करार के कारण बहुजन समाज का राजनीतिक सशक्तिकरण अवरुद्ध हुआ।

 

इस ऐतिहासिक अन्याय के विरोध में बहुजन समाज को अब पुनः सजग होने की आवश्यकता है – यही संदेश इस परिषद के माध्यम से दिया जाएगा। बहुजनों की राजनीतिक एकता का नया अध्याय इस परिषद से शुरू होगा, ऐसा विश्वास डॉ. चलवादी ने व्यक्त किया।

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