
“हमें सभी सुविधाओं के साथ एकात्मिक विकास चाहिए!” — लोकमान्य नगर पुनर्विकास पर रहिवासी संघ की भूमिका
पुणे: शहर के मध्यवर्ती भाग लोकमान्य नगर का पुनर्विकास फिलहाल एक अहम मुद्दा बन गया है। लोकमान्यनगर रहिवासी संघ ने स्पष्ट किया है कि पुनर्विकास केवल टुकड़ों में न होकर सभी सुविधाओं के साथ एकात्मिक क्लस्टर डेवलपमेंट के रूप में होना चाहिए।
महाराष्ट्र गृहनिर्माण एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) ने हाल ही में पुनर्विकास नीति घोषित की है। इस नीति के अंतर्गत पुणे की प्रमुख और केंद्रीय बस्तियों में से एक लोकमान्य नगर का कायापलट होने जा रहा है। इसी परिप्रेक्ष्य में रहिवासी संघ ने पत्रकार परिषद आयोजित कर एकात्मिक पुनर्विकास की माँग रखी।
इस अवसर पर रहिवासी संघ के अध्यक्ष विनय देशमुख, सुनील शहा, प्रशांत मोहोळकर, विवेक लोकूर समेत बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। संघ का कहना है कि यदि एकीकृत पुनर्विकास हुआ तो पुणे के मध्य में फैले 16 एकड़ का यह प्रकल्प महाराष्ट्र के लिए पुनर्विकास का आदर्श उदाहरण साबित होगा। लंबे समय से निवासियों की जो स्वप्नपूर्ति अधूरी थी, उसे म्हाडा की नई नीति के माध्यम से साकार किया जा सकता है। आने वाली पीढ़ियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस योजना को अमल में लाना आवश्यक है। परियोजना पूरी होने के बाद अगले 100 वर्षों तक नागरिकों को बुनियादी सुविधाओं या जीवनशैली सुधार को लेकर कोई चिंता नहीं करनी पड़ेगी, ऐसा नागरिकों ने स्पष्ट किया।
इसी दौरान संघ ने चेतावनी दी कि यदि एकल पुनर्विकास किया गया तो सीमित सुविधाएँ, छोटे आकार के फ्लैट्स, असमान व बेतरतीब निर्माण और अधोसंरचना पर अतिरिक्त दबाव जैसी समस्याएँ सामने आएँगी। वहीं, एकात्मिक पुनर्विकास होने पर पूरे क्षेत्र का सर्वांगीण विकास होगा और उद्यान, पार्किंग, सामुदायिक हॉल, सुरक्षा व्यवस्था जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। साथ ही चौड़ी सड़कों, पानी आपूर्ति, बिजली और ड्रेनेज जैसी सुविधाएँ सुनियोजित ढंग से खड़ी करना संभव होगा।
सुनील शहा ने कहा कि “एकात्मिक विकास ही लोकमान्य नगर का भविष्य सुरक्षित कर सकता है।”



