रीवा

विन्ध्य क्षेत्र में पहली बार हुआ स्किन डोनेशन लोगों में अंगदान के प्रति बढ़ी जागरूकता 

 

विन्ध्य क्षेत्र में पहली बार हुआ स्किन डोनेशन लोगों में अंगदान के प्रति बढ़ी जागरूकता

उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल के आह्वान से प्रेरित होकर लोग कर रहे हैं अंगदान

 

रीवा विशाल समाचार. विन्ध्य क्षेत्र में पहली बार स्किन का डोनेशन किया गया। श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय अन्तर्गत संजय गांधी अस्पताल में गत दिनों दिवंगत व्यक्ति के शरीर से उनके परिजनों ने स्किन डोनेट कराई। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने गत मई माह में स्किन बैंक के शुभारंभ अवसर पर लोगों से आह्वान किया था कि अपने निकटतम दिवंगत परिजनों का अंगदान करें जिससे अन्य मरीजों के लिए अंग उपयोग में आ सकें। उप मुख्यमंत्री जी की पहल का सकारात्मक परिणाम आ रहे हैं और लोगों में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ी है। स्किन बैंक के शुभारंभ के चार माह में ही स्किन दान का निर्णय लोगों में अंगदान से संबंधित जागरूकता का प्रमाण है।

गत दिनों तोपखाना महाजन टोला रीवा निवासी शिवेन्द्र कुमार पाण्डेय का देहांत हो गया था। श्रीमती प्रतिभा पाण्डेय जो महिला एवं बाल विकास विभाग में कटनी में जिला कार्यक्रम अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं उन्होंने अपने स्वर्गीय पति श्री पाण्डेय की स्किन को डोनेट करने की इच्छा व्यक्त की। श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में सर्जन डॉ सौरभ सक्सेना और डॉ अजय पाठक की टीम ने स्वर्गीय पाण्डेय के शरीर की स्किन हार्वेस्टिंग करके स्किन बैंक में प्रिजर्व की गई। इस प्रिजर्व की हुई स्किन को माइक्रो बायॅलाजिकल एण्ड बायोकेमिकल टेस्ट के पश्चात प्रोसेसिंग कर आवश्यकतानुसार अन्य गंभीर या ज्यादा जले हुए मरीज में लगाई जा सकेगी और इससे गंभीर जले हुए मरीजों की जान बच सकेगी। स्वर्गीय श्री शिवेन्द्र पाण्डेय की स्किन के अतिरिक्त उनके परिजनों ने उनकी कार्निया का भी दान किया है।

विभागाध्यक्ष डॉ सौरभ सक्सेना ने बताया कि दुर्घटना या बीमारी से व्यक्ति की मृत्यु के चार से छ: घंटे के समय में स्किन हार्वेस्टिंग कर मृत व्यक्ति का शरीर परिजनों को सौंपा दिया जाता है। डीन डॉ सुनील अग्रवाल के मार्गदर्शन में श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय में स्किन डोनेशन व ऑर्गन डोनेशन से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। प्लास्टिक सर्जरी विभाग के स्किन बैंक में दानदाताओं से प्राप्त स्किन को छ: माह से दो साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है तथा आवश्यकतानुसार इसे बिना किसी जोखिम के जरूरतमंद मरीजों के उपयोग में लाया जा सकता है।

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