
शोध, नवाचार और उद्योग के बीच समन्वय जरूरी : राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे, 10 जून। महाराष्ट्र के राज्यपाल Jishnu Dev Varma ने कहा कि शोध और उसके व्यावहारिक उपयोग के बीच की दूरी को समाप्त करने के लिए विश्वविद्यालयों, उद्योगों, स्टार्टअप्स, निवेशकों और सरकारी संस्थाओं के बीच प्रभावी समन्वय आवश्यक है।
वे पुणे में आयोजित ‘टेक्नोलॉजी ट्रांजिशन एंड इनोवेशन एक्सेलरेटर’ अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर संबोधित कर रहे थे। यह कार्यशाला 10 से 12 जून तक COEP Technological University और CANEUS International के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है।
राज्यपाल ने कहा कि देश में उच्च गुणवत्ता का शोध कार्य हो रहा है, लेकिन अनेक महत्वपूर्ण शोध परियोजनाएं प्रयोगशालाओं और शोध पत्रों तक सीमित रह जाती हैं। उन्हें उद्योग, शासन और समाज के लिए उपयोगी समाधानों में बदलना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि देश में 1.3 लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप्स और हजारों शोध परियोजनाएं होने के बावजूद बहुत कम नवाचार बाजार तक पहुंच पाते हैं।
इस अवसर पर वरिष्ठ वैज्ञानिक Raghunath Mashelkar ने कहा कि भारत की पहचान नवाचार आधारित राष्ट्र के रूप में होनी चाहिए। उन्होंने शोध से लेकर व्यावसायीकरण तक की प्रक्रिया को मजबूत बनाने तथा स्टार्टअप्स को अधिक अवसर देने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में कुलपति प्रो. सुनील भिरुड, कॅनियस इंटरनेशनल के संस्थापक मिलिंद पिंपरकर, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, शोधकर्ता, उद्यमी और छात्र उपस्थित रहे। इस दौरान कार्यशाला के लिए तैयार ‘हैंडबुक’ का भी विमोचन किया गया।



