
कोजागरी पूर्णिमा पर सजी “ग़ज़लियत – दिल की दास्तां” की सुरमयी शाम
पुणे: “तुमको देखा तो ये खयाल आया…”, “स्वप्नांचे वय कायम सोळा…”, “सलोना सा साजन…”, “रंजिशे जो है…” जैसी पुरानी और नई हिंदी–मराठी ग़ज़लों से सजी एक सुरमयी शाम — “ग़ज़लियत – दिल की दास्तां” — का आयोजन कोजागरी पूर्णिमा के अवसर पर किया गया। यह कार्यक्रम एम.ई.एस. सभागार, बाल शिक्षण मंदिर, कोथरूड (पुणे) में आयोजित किया गया, जिसमें पुणेकर संगीतप्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस अवसर पर प्रसिद्ध गायिका सन्मिता धापटे-शिंदे ने अपनी मधुर आवाज़ में एक से बढ़कर एक ग़ज़लें प्रस्तुत कर उपस्थित श्रोताओं का मन मोह लिया। उनके सुमधुर गायन ने कार्यक्रम को भावपूर्ण रंग में रंग दिया।
कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग के सहआयुक्त राहुल मोरे, कस्टम अधीक्षक सुरेश सोनावणे, सहसंचालक (साखर आयुक्तालय) सचिन रावळ, निर्माता निलेश नवलाखा, उदय जगताप, सोनाली तनपुरे, पूर्व नगरसेवक विजय खळदकर, नवनाथ जाधव, भारती दरेकर, विजयसिंह गायकवाड़, लेखक शरद तांदळे, सुरेश वैराळकर, महेश थोरवे, विनोद गलांडे और दर्शना सूर्यवंशी सहित अनेक मान्यवर उपस्थित थे।
‘सूर नवा ध्यास नवा’ प्रतियोगिता की “महागायिका” उपाधि से सम्मानित सन्मिता धापटे-शिंदे को इस अवसर पर दीप्ति कुलकर्णी, अपूर्व द्रविड, अपूर्व गोखले, कार्तिकस्वामी और रोहित कुलकर्णी ने संगीत संगत में सहयोग दिया।
कार्यक्रम के दौरान रुहान और उल्मेघ ने भी दर्शकों से संवाद साधकर माहौल में और भी रंग भर दिए।
कोजागरी पूर्णिमा की इस रात “ग़ज़लियत” ने श्रोताओं को संगीत और शब्दों की अद्भुत दुनिया में ले जाकर एक यादगार शाम दी।


