
पुणे के शोधकर्ता डॉ. तुषार निकाळजे ने चुनाव प्रशासन सुधार के लिए पेटेंट दाखिल किया
पुणे (वि०स० प्रतिनिधि): चुनाव प्रशासन में महत्वपूर्ण बदलाव लाने वाली एक नवोन्मेषी प्रक्रिया का पेटेंट पुणे के शोधकर्ता डॉ. तुषार निकाळजे ने भारतीय पेटेंट कार्यालय में विहित नमूना और शुल्क के साथ दाखिल किया है। पेटेंट कार्यालय में इस प्रस्ताव पर वर्तमान में प्रक्रिया चल रही है।
डॉ. निकाळजे द्वारा प्रस्तुत इस पेटेंट की मूल संकल्पना है: “संविधानिक और असंविधानिक मतपत्रों के रंगानुसार मतदान प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी का फॉर्म तैयार करना”। यह पिछले 75 वर्षों में चुनाव प्रक्रिया में दूसरा बड़ा सुधार है। इससे पहले वर्ष 2004 में बॅलेट पेपर के स्थान पर ईवीएम मशीन का उपयोग शुरू किया गया था।
डॉ. निकाळजे, जो सामाजिक विज्ञान के विशेषज्ञ भी हैं, के अनुसार, यदि चुनाव आयोग इस पेटेंट को अपनाता है, तो भारत के 10,48,000 मतदान केंद्रों पर कार्यरत 56 लाख चुनाव कर्मचारी और अधिकारी प्रति व्यक्ति लगभग 25 मिनट का समय बचा सकेंगे, जिससे तनाव भी कम होगा।
डॉ. निकाळजे ने आगे कहा, “भविष्य में यदि ‘एक देश, एक चुनाव’ लागू किया जाए या मतदाता की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष के बजाय 16 वर्ष कर दी जाए, तो इस पेटेंट की उपयोगिता और भी बढ़ जाएगी। कई देशों में मतदाता उम्र घटाकर 16 कर दी गई है। मतदाता संख्या में वृद्धि होने पर मतदान केंद्रों और कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ेगी, और तब यह पेटेंट चुनाव आयोग के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।”
सदर पेटेंट और उससे संबंधित ट्रेड सीक्रेट तथा कॉपीराइट के उपयोग के नियम और अधिकार स्पष्ट रूप से निर्धारित किए गए हैं। कुछ परिस्थितियों में इन्हें शिथिल भी किया जा सकता है। डॉ. निकाळजे ने पहले ही अन्य देशों में इस संकल्पना से संबंधित कॉपीराइट, पेटेंट और ट्रेडमार्क दाखिल करने के लिए पूर्व अनुमति प्राप्त कर ली है।
डॉ. निकाळजे ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त, नई दिल्ली के साथ-साथ गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, केरल, गोवा, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य 15 राज्यों के निर्वाचन आयुक्तों को इस पेटेंट की जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि चुनाव आयोग इस पेटेंट का उपयोग करता है, तो वे किसी भी आर्थिक मानधन की मांग नहीं करेंगे।
डॉ. निकाळजे ने कहा, “यदि किसी निर्वाचन या सरकारी कार्यालय को इस पेटेंट के बारे में विस्तृत जानकारी या प्रात्यक्षिक की आवश्यकता हो, तो मैं उन्हें पूर्ण सहयोग प्रदान करूंगा। मेरा उद्देश्य देशहित में इस शोध का उपयोग सुनिश्चित करना है। यदि मेरा शोध वास्तव में देशहित में काम आता है, तो इसे सफल माना जाएगा।”

