खाद्य पदार्थों में मिलावट की पहचान की परीक्षण विधि
रीवा विशाल समाचार
रीवा . खाद्य सुरक्षा प्रशासन द्वारा आम नागरिकों को दैनिक उपयोग की विभिन्न वस्तुओं एवं खाद्य पदार्थों में मिलावट की पहचान के लिए परीक्षण विधि की जानकारी दी गई है। इस परीक्षण विधि का उपयोग कर मिलावटी चीजों की आसानी से पहचान की जा सकती है। दूध और दही में मिलावट को जानने के लिए दूध व पानी बराबर मिलाकर हल्का गर्म कर दो-तीन बूंद टिंचर आयोडीन डालने से यदि रंग नीला हो जाए तो स्टार्च की मिलावट होती है। इसी प्रकार पनीर, मावा व छेने की मिठाईयों में दो-तीन बूंद टिंचर आयोडीन डालने पर रंग काला आ जाए तो इसमें भी स्टार्च मिला हो सकता है। घी को तेज गर्म करने पर यदि यह तेजी से नहीं पिघलता और गर्म होने के साथ खुशबू कम हो तो यह मिलावटी हो सकता है। कटे हुए आलू के टुकड़े पर थोड़ा सा नमक डालने के बाद दो-तीन बूंद नीबू रस डालते ही यदि रंग नीला आ जाए तो इसमें आयोडीन मिला होगा। हल्दी, मिर्ची, धनिया व गरम मसाले में दो-तीन बूंद टिंचर आयोडीन डालने पर रंग नीला आ जाए तो उसमें स्टार्च की मिलावट होती है। इसी प्रकार लाल मिर्ची व हल्दी पाउडर को काँच की ग्लास में भरकर रखने पर यदि गहरा रंग आए तो यह मिलावटी है। हींग में मिलावट की पहचान के लिए इसे एक ग्लास पानी में डालकर घोलने पर यदि पानी दुधिया न हो और हींग नीचे बैठ जाए तो हींग मिलावटी है। काली मिर्च को ग्लास से भरे पानी में डालने पर काली मिर्च तलहटी में बैठ जाए और पपीते के बीज या अशुद्धियां सतह पर तैरने लगे तो वह मिलावटी होती है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा परीक्षण विधि में बताया गया है कि खाद्य तेल में एक चम्मच शुद्ध घी मिलाने से यदि रंग लाल हो जाए तो यह तेल लुब्रीकेंट युक्त है। शहद को पानी में डालने पर यदि वह तलहटी में बैठ जाए तो वह शुद्ध होता है। मिलावटी शहद में पानी में सीधे घुल जाता है। इसी प्रकार चायपत्ती सफेद खाली पेपर पर रखकर कुछ बूंद पानी की डालने पर गहरा कलर छोंड़े और वह कलर तेजी से पेपर में फैलने लगे तो चायपत्ती में मिलावट होगी। आइसक्रीम को एक काँच की कटोरी में लेकर दो-तीन बूंद नीबू रस डालने पर यदि बुलबुले आएं तो डिटर्जेंट की मिलावट होगी। चाँदी के वर्क को हथेली में रखकर घिसने पर शुद्ध वर्क गायब हो जाएगा और यदि उसमें एल्युमीनियम की मिलावट होगी तो वर्क हथेली में बना रहेगा।

