
शाश्वत खेती के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग आवश्यक – उपमुख्यमंत्री अजित पवार
पुणे: “कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का उपयोग कर शाश्वत (सतत) खेती की दिशा में आगे बढ़ना ही इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य है। किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए जिला स्तर पर समन्वित और परिणामकारक योजनाएं लागू की जानी चाहिए,” ऐसा मत राज्य के उपमुख्यमंत्री और पुणे जिले के पालकमंत्री अजित पवार ने व्यक्त किया।
उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने आज “दिशा कृषि उन्नति @2029” और “कृषि समृद्धि योजना 2025-26” इन महत्त्वाकांक्षी कार्यक्रमों की सविस्तर समीक्षा कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे की उपस्थिति में की। जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने इस अवसर पर प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विस्तृत माहिती दी।
बैठक में सांसद अमोल कोल्हे, विधायक दिलीप वळसे पाटील, बापू पठारे, शरद सोनवणे, बाबाजी काळे, ज्ञानेश्वर कटके, माजी सांसद आढळराव पाटील, माजी विधायक अतुल बेनके, कृषि आयुक्त सूरज मांढरे, जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी, कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारी, किसान उत्पादक समूहों के पदाधिकारी तथा किसान उपस्थित थे।
जिलास्तरीय “कृषि समृद्धि” उपक्रमों के तहत निर्यातक्षम केले की खेती को प्रोत्साहन, जैविक पद्धति से केले व स्ट्रॉबेरी उत्पादन हेतु “10 ड्रम पद्धति” (Deccan Valley, IKS और Shiv Prasad FPC) का उपयोग, अंजीर व सीताफल प्रसंस्करण केंद्र (पुरंदर हाइलैंड FPC), स्ट्रॉबेरी उत्पादन व विपणन श्रृंखला सुदृढ़ करने के लिए पॉलीहाउस, पानी की टंकियां, पिकअप वैन व पैक हाउस जैसे प्रकल्पों को शामिल किया गया है।
इसके साथ ही गन्ना फसल के बीज परिवर्तन के लिए VSI और शुगर मिलों की सहायता से प्रकल्प लागू किए जाएंगे। मशीनों के माध्यम से धान रोपण को बढ़ावा देना, किसान ड्रोन का वितरण और एग्री हैकाथॉन का आयोजन जैसे उपक्रम भी प्रस्तावित किए गए हैं।
राज्यस्तर पर 10 प्रतिशत निधि से कुल ₹35.60 करोड़ का प्रावधान कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान केंद्रों और कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए प्रस्तावित है।
इसमें कृषि महाविद्यालय, पुणे में एग्री इन्क्यूबेशन सेंटर (₹14.94 करोड़),
केवीके नारायणगांव में स्ट्रॉबेरी प्रसंस्करण केंद्र, हाइपरस्पेक्ट्रल एनालिसिस प्रयोगशाला और बीज प्रसंस्करण केंद्र,
केवीके बारामती में डिजिटल ICT एक्सटेंशन लैब, डीएनए सीक्वेंसिंग यूनिट, ग्राफ्टिंग रोबोट और बायो-फर्टिलाइज़र प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना के लिए निधि प्रस्ता
वित की गई है।

