पूणे

निजी अस्पतालों की ‘आर्थिक लूट’ से गरीब जनता को मुक्त कराएं!

निजी अस्पतालों की ‘आर्थिक लूट’ से गरीब जनता को मुक्त कराएं!

विशेष निरीक्षक की नियुक्ति करेंडॉ. हुलगेश चलवादी की मांग

 

पुणे  डीएस तोमर:

 

पुणे: राज्य सरकार को चाहिए कि वह तत्काल कदम उठाकर निजी अस्पतालों द्वारा की जा रही आम जनता की आर्थिक लूट पर रोक लगाए — ऐसी मांग बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश महासचिव एवं पश्चिम महाराष्ट्र के मुख्य प्रभारी डॉ. हुलगेश चलवादी ने शुक्रवार (31 अक्टूबर) को की।

 

डॉ. चलवादी ने कहा कि प्रत्येक जिले में विशेष निरीक्षकों की नियुक्ति कर शहरों में संचालित सभी निजी अस्पतालों के कार्यों की नियमित निगरानी की जाए तथा मरीजों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के लिए विशेष सहायता कक्ष व हेल्पलाइन नंबर शुरू किए जाएं। उन्होंने बताया कि इस विषय पर वे शीघ्र ही राज्यपाल और स्वास्थ्य मंत्री को निवेदन पत्र सौंपेंगे।

 

डॉ. चलवादी ने कहा कि निजी अस्पताल आज “नफाखोरी के अड्डे” बन चुके हैं। गरीब और आम नागरिकों से उपचार के नाम पर लाखों रुपये की मनमानी बिलिंग की जा रही है। महाराष्ट्र सार्वजनिक न्यास कानून के अंतर्गत नोंदणीकृत कई निजी अस्पताल नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं। धर्मादाय आयुक्तालय के अधीन आने वाले अस्पतालों को गरीब व दुर्बल वर्ग के मरीजों के लिए 10% बेड और 2% जांच में छूट देना अनिवार्य है, लेकिन इसकी पालनविधि पूरी तरह से ठप है।

 

उन्होंने कहा कि यदि सभी निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सतत निगरानी रखी जाए और गरीब मरीजों से संबंधित योजनाओं की सही तरह से अमलबजावनी हो, तो आम नागरिकों की आर्थिक लूट पर रोक लगाई जा सकती है।

 

एक रिपोर्ट के अनुसार, कई निजी अस्पताल मरीजों को अनावश्यक रूप से अधिक दिनों तक भर्ती रख रहे हैं, गैर-जरूरी जांचें करवा रहे हैं तथा उपचार शुल्कों की दरें सार्वजनिक नहीं करते। यह सब गंभीर अनियमितताओं के अंतर्गत आता है। यदि सरकार इस पूरे गैरकानूनी तंत्र की कड़ी जांच कराए, तो कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

 

सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, हाल ही में राज्य के कुल 23,354 निजी अस्पतालों की जांच की गई, जिनमें से 5,134 अस्पताल विभिन्न नियमों के उल्लंघन में पाए गए। “बॉम्बे नर्सिंग होम्स रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1949” के तहत प्रत्येक अस्पताल को निर्धारित आधारभूत सुविधाएँ, पारदर्शी बिलिंग प्रणाली, तक्रार निवारण व्यवस्था, प्रशिक्षित कर्मचारी, स्वच्छता, अग्निसुरक्षा तथा जैव-चिकित्सीय कचरा प्रबंधन रखना आवश्यक है।

 

डॉ. चलवादी ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन यह साबित करता है कि राज्य में निजी अस्पतालों की पुनः व्यापक जांच आवश्यक है। इसलिए सरकार को तत्काल चिकित्सा क्षेत्र में विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर यह जांच करानी चाहिए, ताकि जनता को न्याय मिल सके और स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता स्थापित हो।

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