भिमा कोरेगांव स्मारक के नाम पर हो रही धोखाधड़ी बंद करो : राहुल डंबाळे
मूलभूत सुविधाओं पर अजीत पवार का वादा पूरा किया जाए
पुणे : भीमा कोरेगांव विजय स्तंभ स्थल को राष्ट्रीय स्मारक बनाने की मांग को लेकर चल रही आंबेडकरी चळवळ (आंदोलन) की भावना का पिछले कई वर्षों से दुरुपयोग किया जा रहा है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनी स्थानीय समिति द्वारा विकास आराखड़े (योजना) के नाम पर बार-बार आंबेडकरी समाज के साथ धोखाधड़ी की जा रही है।
इसी तरह की स्थिति हाल ही में हुई जिलाधिकारी की बैठक में भी देखने को मिली, जिसके बाद राहुल डंबाळे ने जिलाधिकारी जितेंद्र दुडी से आग्रह किया है कि भविष्य में ऐसी कोई भी भ्रामक कार्रवाई न की जाए।
2018 में ही तैयार हुआ था विकास आराखड़ा
भीमा कोरेगांव विजय स्तंभ को शूरवीर महार योद्धाओं के सम्मान में राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के लिए आंबेडकरी समाज की ओर से “भीमा कोरेगांव विजय स्तंभ शौर्यदिन समन्वय समिति” लगातार प्रयासरत है।
साल 2018 में तत्कालीन जिलाधिकारी के माध्यम से राज्य सरकार को लगभग 98 करोड़ रुपये का विकास आराखड़ा (विकास योजना) प्रस्तुत किया गया था। उस समय सरकार ने इस परियोजना के लिए धन की कोई कमी नहीं होने देने का आश्वासन दिया था।
सामाजिक न्याय विभाग के तत्कालीन मंत्री धनंजय मुंडे ने तो 100 करोड़ रुपये के स्मारक की आधिकारिक घोषणा भी की थी और जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनी समिति को तुरंत आराखड़ा तैयार करने का निर्देश दिया था।
2018 से अब तक नहीं हुआ कोई कार्य
वर्तमान सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाठ ने भी स्मारक को लेकर सरकार की गंभीरता दोहराई थी, लेकिन 2018 से अब तक न तो एक रुपया खर्च हुआ है और न ही कोई ठोस कार्य आरंभ हुआ है। इस कारण आंबेडकरी समाज में नाराजगी बढ़ रही है और लोगों का कहना है कि सरकार अब और छल न करे।
अजीत पवार का अधूरा वादा पूरा करो
पिछले वर्ष राज्य के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने भीमा कोरेगांव में बैठक कर वहां आने वाले अनुयायियों के लिए पेयजल, शौचालय, बैठने की व्यवस्था, पार्किंग जैसी मूलभूत सुविधाएं दो माह के भीतर विकसित करने का आदेश दिया था। इसकी जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग और जिलाधिकारी को संयुक्त रूप से सौंपी गई थी।
लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस पर “भीमा कोरेगांव विजय स्तंभ शौर्यदिन समन्वय समिति” ने पिछले सप्ताह जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर नाराजगी जताई और तत्काल सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
कानूनी विवाद से मुक्त भूमि पर करें कार्य
पिछले सप्ताह लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में फिर से स्मारक के लिए कानूनी विवादित भूमि का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया, जिस पर तत्काल कार्य संभव नहीं है।
इसलिए राहुल डंबाळे ने आग्रह किया है कि विवादित भूमि को छोड़कर विवाद-मुक्त क्षेत्र में आने वाले अनुयायियों के लिए तुरंत आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं


