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अब किताब में, दुनिया के पहले व्हाइट टाइगर की दास्तां’

अब किताब में, दुनिया के पहले व्हाइट टाइगर की दास्तां

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान: रीवा मध्य प्रदेश 

रीवा । मध्यप्रदेश के विंध्य क्षेत्र की शान व प्रतिष्ठा का पर्याय, दुनिया का पहला व्हाइट टाइगर ‘मोहन’, जिससे समूचे भारत वर्ष के जंगलों में रह रहे बाघों के दस्तावेजीकरण के युग मेंका सूत्रपात हुआ है। वह जंगल की मांद में तब तक सिमटा,सिमटा, सकुचा, सकुचा पड़ा रहा हैं, जब तक रीवा राज्य के अंतिम शासक महाराजा मार्तण्ड सिंह जूदेव की निगाहें उससे दो-चार नहीं हुई थी।

 

लगभग एक पूरी शताब्दी जंगल की आखेट कथाओं में रहे आए दुनिया के पहले व्हाइट टाइगर ‘मोहन’ की मांद से लेकर गोविंदगढ़ राजमहल में आने तक की सर्वथा अनजानी व अनकही दास्तां अब शीघ्र ही वन्य प्रेमियों और पर्यटकों को पूरी प्रामाणिकता के साथ ‘व्हाइट टाइगर, कुदरत की तख़लीक़ का करिश्मा’ किताब के रूप में, दुर्लभ चित्रों के साथ देखने और पढ़ने को मिलेगी।

 

‘व्हाइट टाइगर, कुदरत की तख़लीक़ का करिश्मा’ मध्यप्रदेश शासन द्वारा एक लाख रुपए की सम्मान निधि के साथ प्रदत्त ‘बनारसी दास चतुर्वेदी पत्रकारिता सम्मान’ से सम्मानित विंध्य क्षेत्र के शीर्षस्थ वरिष्ठ पत्रकार, लेखक उमाशंकर तिवारी द्वारा रीवा के व्हाइट टाइगर पर किए गए वर्षो के लम्बे शोध व अनुसंधान के बाद लिखी गई एक किताब ही नहीं है बल्कि दुनिया के पहले सफेद बाघ मोहन का एक रोमांचक जिंदगी नामा भी है। जो कि अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर ज्ञानमुद्रा पब्लिकेशन के सौजन्य से प्रकाशित होने जा रही है।

 

देश के प्रतिष्ठित ‘ज्ञान मुद्रा पब्लिकेशन’ के पब्लिशर वरुण महेश्वरी के अनुसार रीवा राज्य के अंतिम शासक व सफेद बाघों के संरक्षक महाराजा मार्तण्ड सिंह जू देव के रोचक व रोमांचक संस्मरणो से लबरेज ग्यारह अध्यायों की यह किताब प्रकाशन के पूर्व ही वन्य प्रेमी देशी व विदेशी पर्यटकों की पसंद बनती जा रही है।

 

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