पूणे

प्रगतिशील भारत और मेक इन इंडिया के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ज़रूरी

प्रगतिशील भारत और मेक इन इंडिया के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ज़रूरी

अजीत गुलाबचंद की राय: निकमार विश्वविद्यालय का दूसरा दीक्षांत समारोह संपन्न

10 छात्रों को स्वर्ण पदक : 1128 छात्रों को उपाधियाँ की प्रदान

 

पुणे,: “प्रगतिशील भारत और मेक इन इंडिया के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बेहद ज़रूरी है. प्रधानमंत्री के सपने को साकार करने के लिए छात्रों को गुणवत्तापूर्ण कार्य करना चाहिए. साथ ही शोध पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए और नई तकनीकों को सीखने के लिए निरंतर प्रयास करे. छात्रों को अपने लक्ष्य को कभी नहीं भूलना चाहिए” यह विचार निकमार विश्वविद्यालय के न्यासी बोर्ड के अध्यक्ष और एच.सी.सी. लिमिटेड के अध्यक्ष अजीत गुलाबचंद ने व्यक्त किए.

 

देश के निर्माण क्षेत्र में अग्रणी निकमार विश्वविद्यालय का दूसरा दीक्षांत समारोह निकमार विश्वविद्यालय, पुणे के सभागार में आयोजित किया गया. वे इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे.

 

इस अवसर पर निकमार विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो. डॉ. विजय गुपचुप, कुलपति डॉ. सुषमा एस. कुलकर्णी, एच.सी.सी. लिमिटेड की प्रबंधन सलाहकार श्रीमती शलाका धवन, महानिदेशक डॉ. तपशकुमार गांगुली, कुलसचिव डॉ. प्रशांत दवे और परीक्षा नियंत्रक डॉ. आदिनाथ दामले के साथ-साथ विश्वविद्यालय के डीन और निदेशक भी उपस्थित थे.

इस दीक्षांत समारोह में एमबीए एडवांस कंस्ट्रक्शन मैनेजमेंट के छात्र सौरभ राठी, एमबीए एडवांस प्रोजेक्ट मैनेजमेंट की छात्रा इशानी राजेश तोरडमल, एमबीए रियल एस्टेट और अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर मॅनेजमेंटके छात्र समर्थ सिंह, मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन के छात्र चेतन राकेश चव्हाण, मास्टर ऑफ प्लानिंग की छात्रा वैष्णवी संतोष बामपलवार, एमबीए इन एनवायर्नमेंटल सस्टेनेबिलिटी की छात्रा स्मिता संभाजी पाटिल, एमबीए इन सस्टेनेबल एनर्जी मैनेजमेंट की छात्रा सवित्रा ए, एमबीए इन फैमिली बिजनेस एंड एंटरप्रेन्योरशिप के छात्र नील दिनेश मदाने, पीजीडी इन क्वालिटी सर्वेइंग एंड कॉन्ट्रैक्ट्स मैनेजमेंट की छात्रा अंजलि सुरेश और बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की छात्रा ज़किया शमशुद्दीन मुल्ला को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया. विभिन्न संकायों के 1128 से अधिक स्नातक छात्रों को भी उपाधियाँ प्रदान की गईं.

 

अजीत गुलाबचंद ने कहा, “गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सतत विकास के माध्यम से ही भारत 2047 तक आत्मनिर्भर बनेगा और एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरेगा. इसके लिए वर्तमान समय में सतत विकास प्रदान करने वाली शिक्षा की आवश्यकता है. ज्ञान की किसी भी शाखा में ज्ञान प्राप्त करने के बाद भी, छात्रों को पर्यावरण संरक्षण और संतुलन के लिए कार्य करना होगा। शिक्षा और नई तकनीक के बल पर सफलता के शिखर तक पहुँचा जा सकता है, यह ईमानदारी से संभव है. छात्रों को सशक्त सृजन के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए और मानवता को समृद्ध बनाने का प्रयास करना चाहिए.”

डॉ. विजय गुपचुप ने कहा, “हम सभी इंजीनियर हैं और शिक्षा और कौशल के माध्यम से इस क्षेत्र की सभी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं. इसलिए, हमें किसी भी समस्या के समाधान के लिए कोई समझौता नहीं करना चाहिए और अपने समय और धन का उचित नियोजन करना चाहिए.”

डॉ. सुषमा कुलकर्णी ने कहा, “जीवन में आगे बढ़ने के लिए, छात्रों को पाँच क्षेत्रों से गुजरना पड़ता है, अर्थात्कंफर्ट झोन, फियर झोन, लर्निंग झोन, ग्रोथ झोन तथा ट्रांसफॉरमेशन झोन हैं. इन क्षेत्रों से सफलतापूर्वक आगे बढ़ने पर ही उनका करियर उज्ज्वल होगा. ” निकमार विश्वविद्यालय के माध्यम से, हमने निर्माण के क्षेत्र में विश्व स्तरीय पाठ्यक्रम शुरू किए हैं. विश्वविद्यालय ने समय-समय पर छात्रों को व्यावसायिक कौशल विकसित करने के लिए मार्गदर्शन दिया है.”

 

डॉ. प्रशांत दवे ने परिचय दिया.डॉ. ज्योतिष सिंह और प्रो. श्रीलक्ष्मी श्रीकुमार ने कार्यक्रम का संचालन किया. डॉ. आदिनाथ दामले ने आभार माना.

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