राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने नैसर्गिक खेती सम्मेलन का किया उद्घाटन
भविष्य की पीढ़ियों के स्वास्थ्य हेतु नैसर्गिक खेती जरूरी – राज्यपाल
पुणे विशाल समाचार। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने आज शिवाजीनगर स्थित कृषि महाविद्यालय में आयोजित एक दिवसीय नैसर्गिक खेती सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे और कृषि विभाग के प्रधान सचिव विकासचंद्र रस्तोगी उपस्थित रहे।
राज्यपाल ने कहा कि रासायनिक खेती के बढ़ते उपयोग से मानव स्वास्थ्य और मिट्टी की उर्वरता पर गंभीर खतरे उत्पन्न हो रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, रासायनिक खाद मिट्टी के सूक्ष्मजीव नष्ट कर देती है, जिससे अन्न के पोषक तत्वों में कमी और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है। उन्होंने कहा कि “आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ रखने के लिए हर परिवार को फेमिली डॉक्टर की तरह नैसर्गिक खेती करने वाले किसान की आवश्यकता होगी।”
नैसर्गिक खेती के पांच प्रमुख घटक
राज्यपाल ने नैसर्गिक खेती के पांच महत्वपूर्ण आयाम बताए—
1. उचित बीज चयन,2. बीजामृत प्रक्रिया,3. घनजीवामृत का प्रयोग,4. जीवामृत के साथ सिंचाई, 5. मल्चिंग और बहुफसली पद्धति
उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी में गांडुओं की संख्या बढ़ती है, जो 10 फीट तक सुरंग बनाकर पानी को जमीन में समाहित करते हैं। देशी गाय के गोबर-गोमूत्र से तैयार जीवामृत मिट्टी को 17 प्रकार के पोषक तत्व प्रदान करता है।
रासायनिक खेती से खतरा बढ़ा
राज्यपाल ने चिंता जताई कि भारत की मिट्टी में ऑर्गैनिक कार्बन घटकर 1.5% से 0.5% से भी कम हो गया है। रासायनिक खेती की लागत बढ़ने से किसान कर्ज़ में डूब रहे हैं। उन्होंने पारंपरिक बीजों के संरक्षण और उन्नयन पर कृषि विश्वविद्यालयों को अधिक शोध करने की आवश्यकता बताई।
जैविक और नैसर्गिक खेती में अंतर
राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि जैविक खेती में एक एकड़ के लिए लगभग 150 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट की जरूरत होती है, जबकि नैसर्गिक खेती में कम लागत पर अधिक उपज व बेहतर गुणवत्ता संभव है। उन्होंने कहा कि “जंगल के पेड़ बिना रासायनिक खाद के सदाबहार रहते हैं। इसलिए हमें प्रकृति की ओर लौटना चाहिए।”
गौ-आधारित खेती पर जोर
उन्होंने देशी गायों के संरक्षण और उनके दूध से होने वाली आय को महत्वपूर्ण बताते हुए, पशुपालन को किसानों के लिए लाभकारी सहायक व्यवसाय बताया। पशुसंवर्धन विभाग से अधिक दूध देने वाली देशी नस्लों पर शोध बढ़ाने की अपील की।
कृषि मंत्री और अधिकारियों का वक्तव्य कृषिमंत्री दत्तात्रय भरणे ने कहा कि आज कृषि में उत्पादन से अधिक गुणवत्ता को महत्व मिल रहा है, इसलिए खेती में बदलाव आवश्यक है। सरकार नैसर्गिक खेती को बढ़ावा देगी।
प्रधान सचिव विकासचंद्र रस्तोगी ने बताया कि महाराष्ट्र में नैसर्गिक खेती का क्षेत्र बढ़ाने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं।
राज्यपाल ने कहा कि यह सम्मेलन केवल औपचारिक आयोजन न रहे, बल्कि किसानों तक सही तकनीक और मार्गदर्शन पहुंचाने का माध्यम बने।


