
गुन्हों की जांच के लिए आधुनिक तकनीक आधारित जांच प्रणाली जरूरी: साइबर विशेषज्ञ
‘इन्वेस्टिगेशन मास्टरक्लास’ के तीसरे दिन साइबर जांच, क्राइम सीन और आतंक वित्तपोषण पर विशेषज्ञों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे। बदलती तकनीक के साथ अपराधों का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। अब अपराध केवल पारंपरिक तरीकों से नहीं, बल्कि स्मार्टफोन और डिजिटल माध्यमों के जरिए भी किए जा रहे हैं। ऐसे में डिजिटल और साइबर अपराधों की प्रभावी जांच के लिए आधुनिक तकनीक तथा साइबर साक्षरता बेहद आवश्यक है। यह बात साइबर अपराध जांच से जुड़े विशेषज्ञों ने ‘इन्वेस्टिगेशन मास्टरक्लास’ के तीसरे दिन आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में कही।
ट्रान्सेंडेंटल टेक्नोलॉजीज और सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के प्रौद्योगिकी विभाग (DoT-SSPU) के संयुक्त तत्वावधान में तथा पुनीत बालन ग्रुप के सहयोग से विश्वविद्यालय के जियोलॉजी विभाग में आयोजित राष्ट्रीय जांच प्रशिक्षण कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक और अपराध जांच से जुड़े विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को आधुनिक जांच तकनीकों की जानकारी दी। इस अवसर पर ट्रान्सेंडेंटल टेक्नोलॉजीज के प्रमुख डॉ. केतन अत्रे भी उपस्थित रहे।
विशेषज्ञ सोनल कामल ने कहा कि किसी भी डिजिटल अपराध की जांच के दौरान घटनास्थल पर मौजूद इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, राउटर और अन्य डिजिटल उपकरणों को वैज्ञानिक तरीके से जब्त कर सुरक्षित रखना जांच की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब्त किए गए कंप्यूटर और अन्य उपकरणों को मूल स्थिति में सुरक्षित रखने से ही जांच निष्पक्ष और प्रभावी हो सकती है।
युगल पाठक ने बताया कि अपराध में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन की जांच के लिए एडीबी, प्लेटफॉर्म टूल्स और अन्य फॉरेंसिक टूल्स का उपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन जब्त करने के बाद उसे किसी भी नेटवर्क से पूरी तरह अलग रखने के लिए एल्यूमिनियम फॉइल में लपेटना चाहिए, ताकि उसमें दूरस्थ रूप से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न की जा सके।
दिल्ली पुलिस के क्राइम विभाग की वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. दृष्टि भूपतानी ने ‘क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन’ विषय पर व्यावहारिक सत्र लिया। उन्होंने कृत्रिम अपराध स्थल तैयार कर हथियारों और अन्य साक्ष्यों की पहचान, संग्रहण और संरक्षण की वैज्ञानिक प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। यह सत्र प्रतिभागियों के लिए बेहद उपयोगी और ज्ञानवर्धक साबित हुआ।
वहीं, सीमा सुरक्षा बल (BSF) के गृह मंत्रालय में सेकेंड-इन-कमांड संजय शर्मा ने आतंकवाद के वित्तपोषण (काउंटर टेरर फाइनेंसिंग) और मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम (एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग) पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आतंकवादी संगठनों के आर्थिक नेटवर्क कैसे काम करते हैं, धन के स्रोतों का पता कैसे लगाया जाता है और जांच के दौरान किन पहलुओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
कार्यशाला में संजय शर्मा ने टेरर फाइनेंसिंग एवं मनी लॉन्ड्रिंग, उदित शर्मा ने साइबर अपराधों की जांच, जबकि फलिंदर डी.एम. ने फिंगरप्रिंट एवं हस्तलेखन दस्तावेज जांच विषय पर भी विशेषज्ञ मार्गदर्शन दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि डिजिटल युग में प्रभावी अपराध जांच के लिए तकनीकी दक्षता और आधुनिक जांच प्रणाली को अपनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।


