
संविधान दिवस पर सजा ‘संविधान लोककला शाहिरी जलसा’
पुणे : विशाल समाचार प्रतिनिधि“होता भीमराव म्हणून माय तुझ्या बोटाला लागली शाई…”, “फक्त पायदळ सेना होती माझ्या भीमाकडे…”, “माझ्या भीमाने घटनेला हिऱ्या मोत्यांनी सजविलं…”, “जगातली देखणी बाई मी भीमाची लेखणी…” जैसे एक से बढ़कर एक बहारदार शाहिरी गीतों के माध्यम से संविधान के मूल्य, सामाजिक समता और लोकतंत्र की ताकत को लोककला के जरिए पुणेकरों को अनुभव करने का अवसर मिला।
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सांस्कृतिक महोत्सव समिति द्वारा आयोजित ‘संविधान लोककला शाहिरी जलसा’ इस मौके का केंद्र रहा। भारतीय संविधान दिवस के उपलक्ष्य में “मेरा संविधान – मेरा गौरव” अभियान के तहत इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में शाहीर शीतल साठे, सचिन माळी, सदाशिव निकम, पृथ्वीराज माळी सहित कई कलाकारों ने शाहिरी प्रस्तुत की।
कार्यक्रम में सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के प्र-कुलगुरु डॉ. पराग काळकर, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के प्रदेश युवक अध्यक्ष पप्पू कागदे, पुणे शहर अध्यक्ष संजय सोनवणे, समिति के अध्यक्ष परशुराम वाडेकर, रिपाइं पश्चिम महाराष्ट्र युवक आघाड़ी प्रमुख शैलेंद्र चव्हाण, अशोक शिरोळे, डॉ. विजय खरे, सरिता वाडेकर, पूर्व उपमहापौर सुनीता वाडेकर, अविनाश कदम सहित कई मान्यवर उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक वाचन से हुई। इसके बाद “भीमराया वंदाया कवन शाहिरी” गीत प्रस्तुत किया गया। फिर “सामर्थ्य पाहिले मी आंबेडकरामध्ये…”, छत्रपति शिवाजी महाराज पर आधारित पोवाड़ा, राजर्षि शाहू महाराज और महात्मा फुले पर आधारित आकर्षक लोकगीतों ने कार्यक्रम में रंग भर दिया।
इसके बाद “कुणी नाही केलं माय माझ्या भिमाने केलं…”, “माझी मैना गावाकड राहिली…”, “देश उभा केला संविधानाने…”, “माझ्या भिमान भलं केलं ग बया…”, “जगातली देखणी बाई मी भीमाची लेखणी…”, “चांदण्याची छाया माझा भीमराया…” जैसे लोकप्रिय गीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संविधान के मूलभूत मूल्यों की जनजागरूकता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना था, यह बात समिति के अध्यक्ष परशुराम वाडेकर ने अपने संबोधन में कही।
इस अवसर पर कूड़ा बीनते समय मिली 10 लाख रुपये से भरी थैली उसके असली मालिक को लौटाने वाली ईमानदार सफाई कर्मी अंजू माने को सम्मानित किया गया। उन्हें 5,000 रुपये नगद देकर सत्कार किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत के साथ हुआ। संचालन अधिवक्ता ज्ञानेश्वर जाविर ने किया।


