माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय में संविधान दिवस पर चिंतन-संगोष्ठी संपन्न
संविधान नागरिक को जागरूक बनाता है – डॉ. सत्येंद्र डहेरिया
संविधान नागरिक को ताकत देने के साथ जिम्मेदारी भी माँगता है”- जयराम शुक्ल
रीवा विशाल समाचार. रीवा संविधान की आत्मा, नागरिकों के अधिकार और लोकतांत्रिक मर्यादाओं विषय पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय,रीवा परिसर में संविधान दिवस के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर निदेशक डॉ. सत्येन्द्र डहेरिया ने कहा कि संविधान ने भारत को शासन की व्यवस्था देने के साथ ही देश के हर नागरिक को जागरूक, संवेदनशील और समान अधिकारों वाला व्यक्ति बनाने का दायित्व भी निभाया है। उन्होंने कहा कि यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद हमें न्याय, स्वतंत्रता और समानता तो देते ही हैं, पर इसके मूल में सद्भाव, समता और सामाजिक एकता समाहित हैं। उन्होंने बताया कि ‘संविधान दिवस मनाने का उद्देश्य नागरिकों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग करना है।
एडजंक्ट प्रोफेसर जयराम शुक्ल ने अपने वक्तव्य में संविधान को भारतीय लोकतंत्र का जीवंत दस्तावेज बताते हुए कहा कि जिस तरह स्वतंत्रता आंदोलन में कलम ने सत्ता को चुनौती दी, उसी तरह संविधान ने आम नागरिक के अधिकारों को सबसे बड़ी ढाल प्रदान करने का काम किया है। लेकिन यह ढाल तभी प्रभावी है जब नागरिक अपनी जिम्मेदारी और दायित्व निभाए। संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, पर साथ ही यह अपेक्षा भी करता है कि नागरिक सत्य, संयम और संवाद की मर्यादा न भूलें।
डॉ बृजेश पांडेय ने तकनीकी युग में संविधान की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “तेजी से बदलते समय में संविधान एक स्थिर मार्गदर्शक की तरह है। भारत का संविधान नागरिक को विचार की स्वतंत्रता देता है। पर यह स्वतंत्रता तभी सार्थक है जब तथ्य-जांच, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व साथ में शामिल हों। इससे पूर्व संगोष्ठी में डॉ आलोक ने कहा कि संविधान किसी शासन–प्रणाली का मात्र दस्तावेज भर नहीं है, यह तो नागरिकों की जीवन-रेखा और गरिमा का संरक्षणग्रन्थ है। संविधान भारतीय समाज की विविधता, संस्कृति और संघर्षों का सम्मिलित रूप है।
बीएमसी की छात्रा ऐश्वर्या श्रीवास्तव ने फ्रीडम ऑफ प्रेस, फैक्ट चेकिंग और जिम्मेदार नागरिक बनने की आवश्यकता पर बात कही। छात्र सूरज गुप्ता, प्रियांशु सिंह ने संविधान की मूल भावना, नागरिक कर्तव्यों और लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर अपने विचार साझा किए।आभार डॉ. नवीन तिवारी. ने व्यक्त किया। संचालन आदर्श तिवारी ने किया। संगोष्ठी में डॉ. नवीन कुमार तिवारी, प्रो. कनिष्क तिवारी, प्रो. आरती श्रीवास्तव, डॉ. अजीत कुमार मिश्र, डॉ. सुनील कुमार, प्रो. वंदना तिवारी, प्रो. प्रदीप के. शुक्ल, प्रो. अपर्णा गोस्वामी, प्रो. सोमेंद्र सिंह, डॉ. नीति मिश्रा, डॉ. दिव्यशंकर मिश्रा, रुपेश नागेन्द्र, राहुल चतुर्वेदी, जय प्रकाश पटेल, प्रो. सौरभ मिश्रा, शैलेन्द्र द्विवेदी, आरती श्रीवास्तव, सहित समस्त स्टाफ एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।


