पूणे

समूह सहकारी गृहनिर्माण संस्था में अनियमितताओं का खुलासा, कार्रवाई तेज—21 दिसंबर को होगा आंदोलन

समूह सहकारी गृहनिर्माण संस्था में अनियमितताओं का खुलासा, कार्रवाई तेज—21 दिसंबर को होगा आंदोलन

 

पुणे :  समूह सहकारी गृहनिर्माण संस्था (विश्रामबागड़ी, दिघी रोड, पुणे) में वित्तीय अनियमितताओं, गलत निर्णयों और आदेशों की अवहेलना के गंभीर आरोपों के बाद विभागीय सहनिबंधक, सहकारी संस्था पुणे विभाग ने महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम की धारा 154 के तहत महत्वपूर्ण कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।

 

मामले की जानकारी के अनुसार, संस्था के 1976–77 के अमानतदार निधि, संकलन राशि एवं अन्य वित्तीय मामलों में गड़बड़ियों को लेकर कई सभासदों ने शिकायतें दर्ज कराई थीं। संचालक मंडल द्वारा समय पर लेखे-जोखे की जानकारी न देना, आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध न कराना और सदनिकाधारकों की शिकायतों की अनदेखी जैसे मुद्दे लगातार उठते रहे।

 

उपनिबंधक सहकारी संस्था पुणे शहर-5 ने इन शिकायतों की जाँच करते हुए प्रारंभिक रूप से संचालक मंडल की त्रुटियाँ साबित होने पर आदेश पारित किए। परंतु आदेशों का पालन न करने और 90 दिनों की अवधि में अमलबजावणी न होने से स्थिति और गंभीर हो गई।

 

संस्थे के सदस्य यह आरोप भी लगा रहे हैं कि संचालक मंडल की लापरवाही से संस्था को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। विभागीय सहनिबंधक ने इस संबंध में आगे की कार्रवाई के लिए उच्चस्तरीय रिपोर्ट दर्ज की है।

 

इस बीच, संबंधित उपनिबंधक पुणे शहर–5 ने भी धारा 148 के अंतर्गत आदेश जारी करते हुए संचालक मंडल की जिम्मेदारी तय की है। आदेशों के बावजूद स्थिति जस की तस रहने से सदनिकाधारकों में नाराज़गी बढ़ गई है।

 

लोक शासन पार्टी इंडिया 21 दिसंबर को करेगी बड़ा आंदोलन

 

लोक शासन पार्टी ऑफ इंडिया की ओर से घोषित किया गया है कि दिनांक 21/12/2025 को सहकार आयुक्त एवं निबंधक सहकारी संस्था, महाराष्ट्र राज्य, पुणे कार्यालय के सामने व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

आंदोलन की प्रमुख माँगें—

सहकार आयुक्त के समक्ष सभासदों की प्रत्यक्ष सुनवाई

बकाया भागीदारी का वितरण

आय व जे-रजिस्टर में प्रविष्टियों की पूर्ति

पानी की सुविधा पुनः शुरू करना,संचालक मंडल को तत्काल भंग करना

प्रशासक की नियुक्ति,संबंधित संचालकों पर आपराधिक मामले दर्ज करना संपूर्ण प्रकरण की व्यापक जाँच

बहुजन समाज पार्टी ने भी इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया है।

सदनिकाधारकों का कहना है कि लंबे समय से लंबित आदेशों के पालन न होने के कारण सरकार की हस्तक्षेप आवश्यक हो गया है।

 

 

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