
मोबाइल का ‘स्मार्ट’ इस्तेमाल हो; अधिक उपयोग से हो रहे है दुष्परिणाम
सूर्यदत्त इंस्टीट्यूट ऑफ साइंटिफिक रिसर्च के सर्वे में सामने आए परिणाम; प्रो. डॉ. संजय बी. चोरडिया की प्रेस वार्ता में जानकारी
पुणे विशाल सिंह: किशोर उम्र के बच्चों में मोबाइल फोन के प्रति आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। हालांकि विद्यार्थियों में मोबाइल के अच्छे-बुरे प्रभावों को लेकर जागरूकता बढ़ी है, फिर भी वे इसके मोह से पूरी तरह बाहर नहीं आ पा रहे हैं। सूर्यदत्त इंस्टीट्यूट ऑफ साइंटिफिक रिसर्च द्वारा किए गए एक सर्वे में सामने आया है कि मोबाइल का स्मार्ट और सीमित उपयोग जहां लाभकारी है, वहीं इसके अत्यधिक इस्तेमाल से शारीरिक और मानसिक दुष्परिणाम भी सामने आ रहे हैं। पढ़ाई के साथ-साथ जानकारी और डिजिटल कंटेंट के लिए मोबाइल पर निर्भरता बढ़ी है, लेकिन अधिक उपयोग से एकाग्रता कम होना और पढ़ाई में बाधा आने की चिंता भी विद्यार्थियों ने जताई है। यह जानकारी सूर्यदत्त एजुकेशन फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ. संजय बी. चोरडिया ने पत्रकार वार्ता में दी।
कुछ साल पहले स्कूल बैग में केवल किताबें, नोटबुक और पेंसिल होती थीं, लेकिन आज उस बैग में एक अदृश्य चीज हमेशा मौजूद रहती है, वह है, मोबाइल फोन। पढ़ाई, मनोरंजन, जानकारी और दोस्तों से संवाद, सब कुछ एक ही स्क्रीन पर उपलब्ध है। लेकिन इसी स्क्रीन की रोशनी में बच्चे क्या सीख रहे हैं और क्या खो रहे हैं, इसे समझने के लिए यह सर्वे किया गया। सर्वे में पुणे शहर के 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 2,700 किशोर विद्यार्थियों को शामिल किया गया। प्रेस वार्ता के दौरान ‘सूर्यदत्त’ की सहयोगी उपाध्यक्ष स्नेहल नवलखा, मुख्य विकास अधिकारी सिद्धांत चोरडिया, पुणे इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड टेक्नोलॉजी के प्राचार्य प्रो. अजीत शिंदे, सूर्यदत्त नेशनल स्कूल की प्राचार्या डॉ. अनुपमा नेवरेकर, कला शिक्षक नेहा पवार और पीआर मैनेजर स्वप्नाली कोगजे उपस्थित थीं।
प्रो. डॉ. चोरडिया के अनुसार, लगभग 40 प्रतिशत विद्यार्थियों ने माना कि यदि मोबाइल का सीमित और संतुलित उपयोग किया जाए तो यह उपयोगी साबित होता है, जो डिजिटल परिपक्वता का संकेत है। वहीं 33 प्रतिशत विद्यार्थियों ने मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से समय की बर्बादी, एकाग्रता में कमी और पढ़ाई पर नकारात्मक असर की शिकायत की। करीब 20 प्रतिशत विद्यार्थियों का कहना है कि मोबाइल से उनकी पढ़ाई में काफी मदद मिलती है। गूगल, यूट्यूब ट्यूटोरियल्स और ऑनलाइन शैक्षणिक संसाधनों से विषय समझने में सहूलियत होती है। जबकि 7 प्रतिशत विद्यार्थी मोबाइल को लेकर तटस्थ रहे और उन्होंने कहा कि मोबाइल हो या न हो, उन्हें खास फर्क नहीं पड़ता।
‘सूर्यरत्न गुरुकुल’ की शुरुआत
इन निष्कर्षों के आधार पर प्रो. डॉ. चोरडिया ने कहा कि स्कूलों में डिजिटल वेलनेस कार्यक्रम लागू करने की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्देश्य तकनीक का विरोध करना नहीं, बल्कि इसके सजग और सीमित उपयोग को बढ़ावा देना है। इसके लिए कार्यशालाएं, काउंसलिंग सत्र और जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। मोबाइल और डिजिटल लत से जूझ रहे युवाओं के मार्गदर्शन के लिए सूर्यदत्त समूह द्वारा ‘सूर्यरत्न गुरुकुल’ नामक नई पहल शुरू की जा रही है। इसके तहत युवाओं को काउंसलिंग, अनुशासित दिनचर्या और व्यवहार संबंधी मार्गदर्शन दिया जाएगा।

विद्यार्थियों के लिए सर्वे की सिफारिशें
– रोजाना के लिए तय स्क्रीन-टाइम निर्धारित करें
– पढ़ाई को प्राथमिकता दें
– अनावश्यक स्क्रॉलिंग, सोशल मीडिया और मनोरंजन से दूरी रखें
– शैक्षणिक ऐप्स का उद्देश्यपूर्ण उपयोग करें
– आंखों के तनाव से बचने के लिए नियमित ब्रेक लें
– खेल, पढ़ने और प्रत्यक्ष संवाद के लिए अधिक समय निकालें
ड्रॉइंग व पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए सूर्यदत्त नेशनल स्कूल की ओर से 21 दिसंबर 2025 को ‘सेव नेशन, सेव वर्ल्ड’ थीम पर ओपन स्कूल ड्रॉइंग और पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है। यह प्रतियोगिता 4 से 6, 7 से 9, 10 से 12 वर्ष और 13 से ऊपर के लोगो के लिए खुली है. कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 8.30 बजे सूर्यदत्त के बावधन परिसर में होगी। प्रतियोगिता में विजेताओं को एक लाख रुपये तक के नकद पुरस्कार और प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे। पंजीकरण के लिए ऑनलाइन लिंक उपलब्ध है। अधिक जानकारी के लिए नेहा पवार (8605953008) और सायली पवार (8975003810) से संपर्क करने की अपील की गई है।


