
मऊगंज में रिश्वत आरोपों पर उबाल, प्रशासन की कार्रवाई से बढ़ा टकराव
शांतिपूर्ण धरना हटाने की कोशिश नाकाम, आंदोलनकारियों ने अर्धनग्न व जल-त्याग आंदोलन की दी चेतावनी
मऊगंज | आलोक कुमार तिवारी
मऊगंज जिले में कलेक्टर के कथित निज सहायक पर रिश्वतखोरी के आरोपों को लेकर विरोध प्रदर्शन सोमवार को चरम पर पहुँच गया। महिला वार्डन से ₹1.12 लाख की कथित रिश्वत मांगने के मामले में जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर कार्यालय के सामने धरना देने का प्रयास किया, जिसे प्रशासन ने सख्ती से रोकने की कोशिश की। इससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई।
मऊगंज के ‘अन्ना हजारे’ कहे जाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता मुद्रिका प्रसाद विश्वामित्र और अगस्त क्रांति मंच के संयोजक कुंज बिहारी तिवारी के नेतृत्व में यह आंदोलन शुरू हुआ। प्रदर्शन से पहले ही एसडीएम राजेश मेहता के निर्देश पर पुलिस-प्रशासन ने धरनास्थल पर पहुँचकर टेंट सामग्री जब्त कर ली और टेंट लगाने वालों को हिरासत में ले लिया। इसके विरोध में प्रदर्शनकारियों ने खुले आसमान के नीचे ही धरना शुरू कर दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, तहसीलदार और पुलिस बल ने दल-बल के साथ पहुँचकर प्रदर्शनकारियों को जबरन हिरासत में लेने का प्रयास किया। आंदोलनकारियों ने गिरफ्तारी का लिखित कारण मांगा, लेकिन कोई भी अधिकारी लिखित आदेश देने को तैयार नहीं हुआ। लोकतांत्रिक अधिकारों के सम्मान की मांग पर प्रदर्शनकारी अड़े रहे, जिसके बाद प्रशासन को पीछे हटना पड़ा।
इस दौरान आंदोलनकारी मुद्रिका प्रसाद विश्वामित्र ने चेतावनी दी कि यदि शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने की कोशिश की गई, तो वे अर्धनग्न आंदोलन और जल-त्याग जैसे कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
शाम तक प्रदर्शनकारी कलेक्टर के कथित निज सहायक पर निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग पर डटे रहे। वहीं, इस पूरे संवेदनशील मामले में जिला प्रशासन की ओर से देर शाम तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।


