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आत्मनिर्भर भारत के लिए ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना अपनाएं

आत्मनिर्भर भारत के लिए ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना अपनाएं

सेवानिवृत्त वायुसेना प्रमुख आर. के.एस. भदौरिया का मत

एमआईटी डब्ल्यूपीयू में 80 वां स्वतंत्रता दिवस उत्साह से मनाया

रिपोर्ट विशाल सिंह 

स्थान पुणे महाराष्ट्र 

पुणे: “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकसित भारत 2047 की ओर बढ़ रहा है. आत्मनिर्भर भारत के लिए छात्रों में ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना होनी चाहिए. रिसोर्सेज, एनर्जी और टेक्नोलॉजी के साथ-साथ सभी क्षेत्रों में देश में आमूलचूल बदलाव हो रहे हैं. ऐसे समय में छात्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी. इस देश की सबसे बड़ी शक्ति आज की युवा पीढ़ी है,” यह मत सेवानिवृत्त वायुसेना प्रमुख आर. के. एस. भदौरिया ने व्यक्त किया.

 

माइर्स एमआईटी शिक्षा संस्थान समूह और एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी की ओर से कोथरूड कैंपस में आर. के. एस. भदौरिया के हाथों ध्वजारोहण कर 80 वां स्वतंत्रता दिवस उत्साह के साथ मनाया गया.

इस अवसर पर एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के संस्थापक अध्यक्ष प्रो.डॉ. विश्वनाथ दा. कराड, संस्थापक ट्रस्टी प्रो. पी.बी. जोशी, एमआईटी डब्ल्यूपीयू के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड, कुलपति डॉ. दत्ता दंडगे, सीएओ डॉ. प्रसाद खांडेकर, कुलसचिव प्रो. गणेश पोकळे, एमआईटी के अधिष्ठाता प्रो. शरदचंद्र दराडे पाटिल, नागपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एस.एन. पठान उपस्थित थे. साथ ही संस्था के सभी निदेशक, प्राध्यापक, शिक्षकेतर कर्मचारी और हजारों छात्र उपस्थित थे.

 

आर. के.एस. भदौरिया ने कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोटेक्नोलॉजी, स्पेस और अन्य क्षेत्रों में देश प्रगति कर रहा है. छात्रों को तकनीक को अपनाने के साथ-साथ चरित्र निर्माण पर भी जोर देना चाहिए.

एमआईटी डब्ल्यूपीयू में छात्रों की शिक्षा के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. आने वाले कुछ वर्षों में भारत सबसे शक्तिशाली देश के रूप में उभरेगा.”

प्रो.डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा, “यह दिन भारत माता के प्रति समर्पण की भावना जगाने का दिन है. अनुशासन, चरित्र और समर्पण के आधार पर प्रत्येक व्यक्ति को देश सेवा करनी चाहिए. साथ ही प्रत्येक को माता-पिता और देश सेवा का कर्तव्य निभाना चाहिए.”

 

डॉ. राहुल वी. कराड ने कहा, “आने वाली पीढ़ी को कोलोनियल माइंडसेट छोड़ना होगा. सभी छात्रों के लिए एनसीसी अनिवार्य किया जाना चाहिए. वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांत पर एमआईटी का निर्माण हुआ है।”

 

इस अवसर पर एनसीसी के छात्रों ने स्लो मार्चिंग करते हुए अतिथियों को ध्वजवंदन स्थल तक लाया.

एनसीसी टुकड़ी ने रूट मार्च कर सलामी दी. साथ ही छात्रों ने नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए.

 

डॉ. दत्ता दंडगे ने प्रस्तावना रखी और हजारों छात्रों को स्वतंत्रता की रक्षा की शपथ दिलाई. छात्र शंभूराज बानुगडे-पाटिल और कृष्णा पाटिल ने कार्यक्रम का संचालन किया और धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया।

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